दक्षिण कोरिया के रेगुलेटर्स ने Google और Apple पर **$4.76 करोड़** (करीब 63.7 अरब वॉन) का भारी जुर्माना ठोका है। कंपनी पर आरोप है कि वे डेवलपर्स को अपने ही पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर कर रही थीं, जिससे बाजार में कॉम्पिटिशन खत्म हो रहा है।
नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना
कोरिया मीडिया एंड कम्युनिकेशंस कमीशन ने जांच के बाद यह पाया कि दोनों टेक दिग्गज अपनी मार्केट पावर का गलत फायदा उठा रही थीं। कंपनीज न केवल अपने इन-ऐप पेमेंट गेटवे को अनिवार्य कर रही थीं, बल्कि बाहर के पेमेंट लिंक्स के इस्तेमाल को भी काफी कठिन बना दिया था। रेगुलेटर के मुताबिक, ये प्रथाएं न केवल डेवलपर्स की पसंद को सीमित करती हैं, बल्कि फेयर कॉम्पिटिशन को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
रेवेन्यू मॉडल पर असर का डर
दिक्कत सिर्फ पेमेंट सिस्टम तक ही सीमित नहीं है। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों कंपनियां ऐप रिव्यू प्रोसेस को लेकर काफी अपारदर्शी (Opaque) बनी हुई थीं। बिना किसी स्पष्ट कारण के ऐप अप्रूवल में देरी करने से छोटे सॉफ्टवेयर डेवलपर्स काफी परेशान थे। इन कंपनियों की ओर से बाहरी ट्रांजैक्शंस पर 26% तक का भारी कमीशन वसूला जा रहा था, जो अब रेगुलेटर्स की नजर में है।
भारत पर क्या होगा असर?
निवेशकों के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत में भी कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) Google की प्ले स्टोर बिलिंग नीतियों की जांच कर रहा है। चूंकि ऐप स्टोर्स से आने वाला रेवेन्यू दोनों कंपनियों (Alphabet और Apple) के लिए हाई-मार्जिन वाला बिजनेस है, ऐसे में दुनिया भर में बढ़ता रेगुलेटरी दबाव उनके फाइनेंशियल भविष्य के लिए एक बड़ा स्ट्रक्चरल रिस्क बन गया है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि ये कंपनियां अपनी ग्लोबल बिलिंग पॉलिसी में क्या बदलाव करती हैं।
