चेन्नई स्थित स्टार्टअप GoSense.ai ने बैंकिंग और फिनटेक ऐप्स के लिए एक नया AI-आधारित सुरक्षा प्लेटफॉर्म पेश किया है। यह टूल रियल-टाइम में धोखाधड़ी रोकने के लिए 'Runtime Application Self-Protection' तकनीक का इस्तेमाल करता है।
चेन्नई की टेक कंपनी GoSense.ai ने फिनटेक कंपनियों और बैंकों के लिए एक अत्याधुनिक सुरक्षा समाधान पेश किया है। यह प्लेटफॉर्म Runtime Application Self-Protection (RASP) तकनीक पर काम करता है, जो एप्लिकेशन के भीतर एक 'सिक्योरिटी शील्ड' की तरह काम करती है। यह पारंपरिक सुरक्षा के विपरीत, सीधे ऐप के अंदर से उपयोगकर्ता की गतिविधियों और डिवाइस की हेल्थ को रियल-टाइम में मॉनिटर करती है, ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी को समय रहते रोका जा सके।
क्यों है इसकी जरूरत?
आज के डिजिटल दौर में UPI पेमेंट्स और डिजिटल लेंडिंग जैसे ऐप्स का चलन बढ़ा है, लेकिन साथ ही नए खतरे भी सामने आए हैं। हैकर्स अब 'डिवाइस रूटिंग', 'एम्युलेटर्स' और 'एक्सेसिबिलिटी एब्यूज' जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर संवेदनशील डेटा चुरा रहे हैं। GoSense.ai का प्लेटफॉर्म इन खतरों को रन-टाइम पर ही पकड़ने में सक्षम है, जो कि पारंपरिक सुरक्षा इंतजामों से अक्सर छूट जाते हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी
स्पष्ट कर दें कि GoSense.ai एक प्राइवेट कंपनी है और यह फिलहाल National Stock Exchange (NSE) या Bombay Stock Exchange (BSE) पर लिस्टेड नहीं है। इसलिए, आम निवेशक इसके शेयरों में ट्रेड नहीं कर सकते। हालांकि, इसका लॉन्च इस बात का संकेत है कि भारत के फिनटेक इकोसिस्टम में साइबर सिक्योरिटी की मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है।
चुनौतियां और भविष्य
यह स्टार्टअप एक ऐसे बाजार में उतरा है जहाँ पहले से ही बड़ी ग्लोबल टेक फर्में और कई स्पेशलाइज्ड स्टार्टअप्स मौजूद हैं। कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'जेनरेटिव AI' के जरिए होने वाले फ्रॉड से खुद को अपडेट रखना होगा। इंडस्ट्री के जानकारों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि बड़ी बैंकें और पेमेंट प्रोवाइडर्स इस नई तकनीक को कितनी जल्दी अपनाते हैं और बड़े स्तर पर यह कितनी कारगर साबित होती है।
