GoKwik AI Voice Tech: D2C ब्रांड्स की बल्ले-बल्ले, कार्ट कन्वर्जन में **2.5 गुना** का उछाल

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
GoKwik AI Voice Tech: D2C ब्रांड्स की बल्ले-बल्ले, कार्ट कन्वर्जन में **2.5 गुना** का उछाल

D2C कंपनियां अब ग्राहकों को लुभाने के लिए AI-पावर्ड वॉयस कॉल्स और WhatsApp का सहारा ले रही हैं। इस हाइब्रिड मॉडल से अटके हुए ऑर्डर्स को पूरा करने में **2.5 गुना** तक की सफलता मिल रही है, जिससे कंपनियों का मार्केटिंग बजट भी बेहतर तरीके से खर्च हो रहा है।

भारत में D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) ब्रांड्स एक बड़ी समस्या से जूझ रहे थे—ग्राहक शॉपिंग कार्ट में सामान तो डाल देते थे, लेकिन पेमेंट पूरा नहीं करते थे। अब इस समस्या को हल करने के लिए कंपनियां AI-पावर्ड वॉयस कॉल की मदद ले रही हैं। पुराने हो चुके टेक्स्ट मैसेज अब ग्राहकों को उतना आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए यह नया वॉयस टूल अब गेम-चेंजर साबित हो रहा है।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

GoKwik के 'KwikEngage' प्लेटफॉर्म के डेटा के मुताबिक, जब ब्रांड्स WhatsApp मैसेज के साथ AI-वॉयस कॉल का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करते हैं, तो कन्वर्जन रेट में जबरदस्त उछाल देखा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हाइब्रिड रणनीति से कंपनियों के रिटर्न ऑन एड स्पेंड (ROAS) में 10 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है।

क्यों है यह तकनीक खास?

यह AI तकनीक सुबह 10 बजे से रात 9 बजे के बीच एक्टिव रहती है। यह ग्राहकों की उन उलझनों को समझती है जो उन्हें खरीदारी करने से रोकती हैं—जैसे डिलीवरी को लेकर शंका, पेमेंट के तरीके या प्रोडक्ट की जानकारी। पहले इतनी बड़ी संख्या में ग्राहकों को मैन्युअल कॉल करना नामुमकिन था, लेकिन AI ने इसे आसान बना दिया है।

चुनौतियां और रिस्क

हालांकि यह तकनीक कमाई बढ़ाने का अच्छा जरिया है, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती है 'स्पैम' का लेबल लगना। यदि AI कॉल जरूरत से ज्यादा दखल देने वाली (intrusive) हो जाती हैं, तो यह ब्रांड की साख खराब कर सकती है। इसलिए, डेटा प्राइवेसी और ग्राहक की सहमति का ध्यान रखना अब कंपनियों के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.