Gnani AI ने अपना नया स्पीच-टू-टेक्स्ट मॉडल Prisma v3.0 लॉन्च किया है। यह मॉडल खास तौर पर भारतीय भाषाओं की जटिलताओं और टेलीफोनी डेटा को सटीक रूप से समझने के लिए तैयार किया गया है, जिससे बैंकिंग और सर्विस सेक्टर को बड़ी मदद मिलेगी।
भारतीय बाजार की भाषाई बारीकियों को ध्यान में रखते हुए Gnani AI ने Prisma v3.0 पेश किया है। यह मॉडल उन चुनौतियों को हल करता है जहां लोग बातचीत के दौरान अपनी क्षेत्रीय भाषाओं और अंग्रेजी को मिला-जुलाकर (Code-mixing) बोलते हैं। ग्लोबल AI मॉडल्स के लिए अब तक इसे सटीक रूप से समझना एक बड़ी चुनौती रही है।
भारतीय डायलेक्ट्स पर खास फोकस
ज्यादातर ग्लोबल मॉडल्स अंतरराष्ट्रीय डेटा पर आधारित होते हैं, लेकिन Prisma v3.0 को स्थानीय टेलीफोन ऑडियो के आधार पर ट्रेन किया गया है। यह सिस्टम बैकग्राउंड शोर को हटाकर क्षेत्रीय बोलियों को पहचानने में माहिर है। कंपनी के अनुसार, यह मॉडल 9 भारतीय भाषाओं में 16.9% का मैक्रो वर्ड एरर रेट (WER) हासिल करता है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों से आगे रखता है।
एंटरप्राइज के लिए कस्टमाइज्ड फीचर्स
बैंकिंग और इंश्योरेंस जैसे सेक्टर को एक ही कॉल से अलग-अलग डेटा की जरूरत होती है। इसे देखते हुए Prisma v3.0 में 4 अलग-अलग प्रोसेसिंग मोड दिए गए हैं:
- Verbatim मोड: कानूनी ऑडिट के लिए हर शब्द को कैप्चर करता है।
- Transcribe मोड: डेटाबेस लॉगिंग के लिए साफ और नॉर्मलाइज्ड टेक्स्ट देता है।
- Code-mix मोड: यह मूल भाषा की स्क्रिप्ट को बरकरार रखता है।
- Transliterate मोड: क्षेत्रीय बोली को अंग्रेजी अक्षरों में बदलता है।
बाजार पर असर
Gnani AI वर्तमान में रोजाना लगभग 5 करोड़ वॉयस इंटरेक्शन प्रोसेस करता है। इस अपडेट के साथ कंपनी एंटरप्राइज सर्विस सेक्टर में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। इसमें 200 कस्टम कीवर्ड्स डालने की सुविधा भी दी गई है, जिससे कंपनियों को अपने प्रोडक्ट नामों को सही तरीके से कैप्चर करने में मदद मिलेगी। हालांकि, देखने वाली बात यह होगी कि बड़ी कंपनियां अपने पुराने सिस्टम से कितनी तेजी से इस नए AI मॉडल पर शिफ्ट होती हैं।
