सेमीकंडक्टर की बम्पर कमाई! 2026 तक रेवेन्यू ₹1.6 ट्रिलियन पहुंचने का अनुमान

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
सेमीकंडक्टर की बम्पर कमाई! 2026 तक रेवेन्यू ₹1.6 ट्रिलियन पहुंचने का अनुमान

ग्लोबल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में बम्पर ग्रोथ की उम्मीद है। Gartner के नए अनुमान के मुताबिक, 2026 तक इंडस्ट्री का कुल रेवेन्यू बढ़कर $1.6 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। यह AI इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी मांग और मेमोरी की कीमतों में तेजी का नतीजा है। हालांकि, बढ़ती मेमोरी की कीमतों से पीसी और स्मार्टफोन जैसे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

AI और मेमोरी का बूम

इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार है। जैसे-जैसे टेक कंपनियां AI वर्कलोड को सपोर्ट करने के लिए डेटा सेंटर में भारी निवेश कर रही हैं, वैसे-वैसे एडवांस्ड चिप्स की मांग भी आसमान छू रही है। इस ट्रेंड के कारण इंडस्ट्री के प्रोडक्ट मिक्स में बड़ा बदलाव आ रहा है, और अनुमान है कि 2030 तक AI डेटा सेंटर इकोसिस्टम कुल सेमीकंडक्टर रेवेन्यू का 53% से ज्यादा हिस्सा हासिल कर लेगा।

AI सिस्टम के लिए बैकबोन का काम करने वाले मेमोरी चिप्स सबसे ज्यादा ग्रोथ दिखा रहे हैं। Gartner का अनुमान है कि अकेले मेमोरी का रेवेन्यू 2026 में $837 बिलियन तक पहुंच जाएगा, जो कुल सेमीकंडक्टर मार्केट का आधा से ज्यादा होगा। खासकर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए जरूरी DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी की मांग इतनी ज्यादा है कि इन सेगमेंट में रेवेन्यू में क्रमशः 246.6% और 371.9% की भारी बढ़ोतरी का अनुमान है। भारी-भरकम मेमोरी सेगमेंट को छोड़ भी दें, तो भी बाकी सेमीकंडक्टर मार्केट में 21.9% की ग्रोथ की उम्मीद है, जो 2026 तक $718 बिलियन तक पहुंच जाएगा।

'मेमफ्लेशन' का खतरा

जहां एक तरफ ये आंकड़े इंडस्ट्री में बूम की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं निवेशक और एनालिस्ट "मेमफ्लेशन" (memflation) नाम के एक बड़े साइड इफेक्ट पर नजर रख रहे हैं। AI सर्वर की जरूरतों को पूरा करने के लिए मेमोरी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए रॉ मैटेरियल की लागत भी बढ़ रही है।

यह उन कंपनियों के लिए प्रॉफिट मार्जिन का जोखिम पैदा करता है जो स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य पीसी जैसे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाती हैं। अगर मेमोरी मैन्युफैक्चरर्स ज्यादा कीमत देने वाले AI डेटा सेंटरों को प्राथमिकता देते हैं, तो कंज्यूमर-ग्रेड कंपोनेंट्स की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। AI स्पेस से बाहर की कंपनियों के लिए, इसका मतलब प्रोडक्शन कॉस्ट में बढ़ोतरी हो सकता है, जिसे ग्राहकों पर डालना मुश्किल हो सकता है, और इससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी पर बुरा असर पड़ सकता है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

निवेशकों के लिए, AI-संचालित ग्रोथ और पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग के बीच के अंतर पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। अगर AI में निवेश की यह बढ़ोतरी उम्मीद के मुताबिक जारी रहती है, तो सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन टाइट रहेगी और कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। लेकिन, अगर मेमोरी की ऊंची कीमतों के कारण इनपुट कॉस्ट ऊंची बनी रहती है और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग कमजोर रहती है, तो डिवाइस मैन्युफैक्चरर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना रहेगा। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां इन बढ़ती इनपुट लागतों को कैसे मैनेज करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.