दुनिया भर में सेमीकंडक्टर बनाने वाले उपकरणों पर होने वाला खर्च 2026 में रिकॉर्ड **$165.9 अरब डॉलर** तक पहुंचने का अनुमान है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग इस उछाल की मुख्य वजह है। भारतीय निवेशकों के लिए, यह वैश्विक इकोसिस्टम के बढ़ते महत्व को दर्शाता है, जबकि भारत अपने **₹1.64 लाख करोड़** के सेमीकंडक्टर मिशन पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट इंडस्ट्री में बड़ा उछाल
इंडस्ट्री बॉडी सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट एंड मैटेरियल्स इंटरनेशनल (SEMI) के अनुसार, ग्लोबल सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट इंडस्ट्री में जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिल रही है। निर्माण उपकरणों की बिक्री 2026 तक रिकॉर्ड $165.9 अरब डॉलर के स्तर को छू सकती है। यह पिछले साल के मुकाबले 23.2% की बढ़ोतरी दर्शाता है। इस बड़ी तेजी के पीछे मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हार्डवेयर, एडवांस मेमोरी चिप्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) उत्पादों की भारी मांग है।
भविष्य का अनुमान और ग्रोथ
2026 के बाद भी इस सेक्टर में ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। अनुमान है कि 2028 तक सालाना बिक्री $229.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। यह ग्रोथ दुनिया भर के प्रमुख चिप निर्माताओं द्वारा फैब्रिकेशन क्षमता का विस्तार करने के लिए किए जा रहे बड़े कैपिटल स्पेंडिंग (पूंजीगत व्यय) से प्रेरित है। ये कंपनियां डेटा सेंटर और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि यह इंडस्ट्री साइक्लिकल (चक्रीय) है। AI बूम के कारण फिलहाल ग्रोथ मजबूत दिख रही है, लेकिन यह वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग में उतार-चढ़ाव और दुनिया के सबसे बड़े चिप निर्माताओं के कैपिटल स्पेंडिंग साइकल में बदलाव के प्रति बेहद संवेदनशील है।
भारत की स्थिति और सेमीकंडक्टर मिशन
जहां दुनिया के बड़े खिलाड़ी एडवांस्ड चिप्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, वहीं भारत 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के माध्यम से अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। इस राष्ट्रीय रणनीति का मुख्य फोकस फिलहाल मैच्योर और कन्वेंशनल नोड्स पर है। ये वो चिप्स हैं जो ऑटोमोटिव, घरेलू उपकरण और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों के लिए बेहद जरूरी हैं। अब तक, सरकार ने छह राज्यों में फैले ₹1.64 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स में फुल-स्केल फैब्रिकेशन प्लांट्स के साथ-साथ असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) यूनिट्स भी शामिल हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए, इन वैश्विक विकासों का असर अप्रत्यक्ष रूप से होगा। वैश्विक इक्विपमेंट बिक्री में उछाल से सीधे तौर पर लिथोग्राफी, एचिंग और डिपोजिशन टूल्स के बड़े अंतरराष्ट्रीय सप्लायर को फायदा होगा। भारत के भीतर, ध्यान मंजूरी मिले फैब्रिकेशन प्रोजेक्ट्स के निष्पादन और कमीशनिंग पर बना रहेगा। इन यूनिट्स की सफलता कई कारकों पर निर्भर करेगी, जिनमें कुशल कार्यबल की उपलब्धता, बिजली की स्थिर आपूर्ति, कच्चे माल तक पहुंच और घरेलू निर्माताओं की जटिल वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एकीकृत होने की क्षमता शामिल है। निवेशक इन विशिष्ट प्रोजेक्ट्स की प्रगति और भविष्य की सरकारी नीतियों पर नजर रख सकते हैं ताकि यह समझ सकें कि अगले कुछ वर्षों में अनुमानित विशाल वैश्विक विस्तार की पृष्ठभूमि में घरेलू विनिर्माण क्षमता कैसे विकसित होती है।
