दुनियाभर में IT खर्च में **14.2%** की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो **2026** तक **$6.37 ट्रिलियन** तक पहुंच सकता है। इसकी मुख्य वजह AI से जुड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश है। यह बदलाव डेटा सेंटर सिस्टम और क्लाउड प्लेटफॉर्म की ओर पूंजी आवंटन में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि कंपनियां AI कंप्यूट क्षमता बनाने की दौड़ में हैं।
Detailed Coverage
AI का जलवा: IT खर्च में आएगी भारी उछाल!
दुनियाभर में टेक्नोलॉजी पर होने वाले खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होने वाली है। कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपना रही हैं। Gartner ने अपना अनुमान बढ़ाया है और अब उम्मीद है कि 2026 तक दुनिया भर में IT पर कुल खर्च $6.37 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा। यह 14.2% की ग्रोथ रेट दिखाता है, जो AI एप्लीकेशंस को सपोर्ट करने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में बड़ी पूंजी निवेश को दर्शाता है।
डेटा सेंटर में बंपर निवेश
सबसे बड़ा बदलाव डेटा सेंटर सिस्टम में देखा जा रहा है, जहां खर्च 2026 तक 62.5% बढ़कर $822 बिलियन होने का अनुमान है। इससे पहले 2025 में भी इस सेगमेंट में 51.6% का इजाफा हुआ था। इस ट्रेंड के पीछे AI सर्वर और उन्हें चलाने के लिए जरूरी पावर व कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग है। भारतीय निवेशकों के लिए, यह हार्डवेयर सप्लायर्स, क्लाउड प्रोवाइडर्स और डेटा सेंटर ऑपरेटर्स के महत्व को दर्शाता है, क्योंकि हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग कंपोनेंट्स की ग्लोबल डिमांड बनी हुई है।
सॉफ्टवेयर और क्लाउड की ग्रोथ
हार्डवेयर के अलावा, सॉफ्टवेयर पर खर्च 2026 तक 15.5% बढ़कर $1.47 ट्रिलियन होने की उम्मीद है। Infrastructure-as-a-service (IaaS) में 29.3% की बढ़ोतरी के साथ यह $287 बिलियन तक पहुंच सकता है। जैसे-जैसे कंपनियां अपने वर्कलोड को AI-रेडी क्लाउड एनवायरनमेंट में ले जा रही हैं, वैसे-वैसे क्लाउड मैनेजमेंट, साइबरसिक्योरिटी और इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम प्रोवाइड करने वाली फर्मों की डिमांड बनी रहने की संभावना है। वहीं, पारंपरिक डिवाइस खर्च में 9.8% की मामूली ग्रोथ की उम्मीद है, जो स्टैंडर्ड हार्डवेयर से AI-ऑप्टिमाइज्ड सिस्टम पर फोकस शिफ्ट होने का संकेत देता है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें और जोखिम
हालांकि ग्रोथ के आंकड़े मजबूत हैं, लेकिन निवेशकों को कुछ ऐसे फैक्टर्स पर नजर रखनी चाहिए जो इन अनुमानों को प्रभावित कर सकते हैं। पहला, इंडस्ट्री अभी भी सेमीकंडक्टर और मेमोरी सप्लाई की कमी से जूझ रही है। एडवांस्ड AI चिप्स की सप्लाई चेन में कोई भी रुकावट डेटा सेंटर के निर्माण में देरी का कारण बन सकती है। दूसरा, AI इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड ज्यादा होने के बावजूद, कंपनियों को बढ़ी हुई प्रोडक्टिविटी या नए रेवेन्यू स्ट्रीम के जरिए इन हाई कैपिटल कॉस्ट को सही ठहराना होगा। अगर कंपनियां इन बड़े निवेशों से अच्छा रिटर्न हासिल नहीं कर पाती हैं, तो भविष्य में खर्च पर दबाव आ सकता है। आखिर में, इन नए डेटा सेंटरों के लिए जरूरी बिजली और खास कूलिंग सिस्टम की हाई कॉस्ट एक बढ़ता हुआ ऑपरेशनल एक्सपेंस है, जो सर्विस प्रोवाइडर्स के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। इन कंपनियों द्वारा एनर्जी कॉस्ट और सप्लाई चेन पार्टनरशिप को कितनी कुशलता से मैनेज किया जाता है, इस पर नजर रखना इस खर्च बूम के लॉन्ग-टर्म इंपैक्ट का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
