Gallup के एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि अमेरिका में **74%** लोग AI को लेकर आशंकित हैं, जबकि एशियाई बाजारों में काफी उत्साह है। निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि इससे क्लाइंट्स का बजट और रेगुलेटरी नियम प्रभावित हो सकते हैं।
ग्लोबल सेंटीमेंट में भारी अंतर
Microsoft और Gallup के हालिया सर्वे के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग राय है। जहां अमेरिका में 74% लोग इस तकनीक को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं, वहीं सिंगापुर जैसे एशियाई देशों में स्थिति उलट है। वहां के 80% से ज्यादा लोग मानते हैं कि AI उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाएगा।
भारतीय IT सेक्टर पर क्या होगा असर?
भारतीय IT कंपनियां अपना बड़ा रेवेन्यू नॉर्थ अमेरिका से हासिल करती हैं। अगर वहां की कंपनियां डेटा प्राइवेसी और नौकरी जाने के डर से AI प्रोजेक्ट्स में निवेश कम करती हैं या कड़े नियम थोपती हैं, तो इसका सीधा असर भारत की दिग्गज IT कंपनियों के ग्रोथ रेट पर पड़ सकता है। हालांकि कंपनियां अपने वर्कफोर्स को ट्रेन कर रही हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर काम शुरू होना क्लाइंट्स के भरोसे पर टिका है।
रेगुलेटरी और कंप्लायंस का खर्च
दुनिया भर में AI को लेकर नियम सख्त हो रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) कड़े कानून लाने की तैयारी में हैं, जिसका पालन करना भारतीय टेक कंपनियों के लिए जरूरी होगा। इससे ऑपरेशन्स का खर्च बढ़ेगा, जो शॉर्ट टर्म में कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।
इंडिया AI मिशन और सरकार की पहल
भारत में तस्वीर अलग है। सरकार 'India AI Mission' के जरिए ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश कर रही है ताकि कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिले। भारतीय IT कंपनियों के लिए अब चुनौती यह है कि वे अपने अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट्स की सावधानी और देश के भीतर बढ़ रहे AI के उत्साह के बीच कैसे संतुलन बनाए रखती हैं। निवेशकों को आने वाले क्वार्टर्स में क्लाइंट्स के खर्च और कंप्लायंस पर होने वाले खर्च पर नजर रखनी चाहिए।
