Glance ने Apple के iOS 27 के साथ मिलकर अपनी शॉपिंग सर्विस को Siri से जोड़ दिया है। अब यूजर्स बिना ऐप्स खोले, केवल आवाज या तस्वीरों के जरिए खरीदारी कर सकेंगे। $30 करोड़ रेवेन्यू वाली यह कंपनी अब AI एजेंट के जरिए ई-कॉमर्स को आसान बनाने की कोशिश में है।
अब वॉइस कमांड से होगी शॉपिंग
Glance ने अपनी शॉपिंग सर्विस को Apple की Siri और Apple Intelligence के साथ इंटीग्रेट कर दिया है। इस बदलाव से यूजर्स को अब शॉपिंग के लिए अलग-अलग ऐप्स पर भटकने की जरूरत नहीं होगी। कंपनी की नई तकनीक के जरिए यूजर्स केवल बोलकर या किसी प्रोडक्ट की फोटो खींचकर उसे सर्च कर सकते हैं, कंपेयर कर सकते हैं और वर्चुअल ट्राई-ऑन भी कर सकते हैं।
यह पूरा सिस्टम Apple के ऑन-डिवाइस AI मॉडल्स पर काम करता है, जिससे डेटा प्रोसेसिंग क्लाउड के बजाय सीधे डिवाइस पर ही हो जाती है।
कंपनी का बिजनेस मॉडल और आंकड़े
अमेरिका में Glance के पास 1 करोड़ (10 million) मंथली एक्टिव यूजर्स हैं, जिनमें से करीब 15% यूजर्स पहले ही इसके AI एजेंट का इस्तेमाल करके शॉपिंग कर रहे हैं। कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति की बात करें तो यह InMobi, Google और Jio Platforms द्वारा बैक्ड एक प्राइवेट कंपनी है, जिसका वार्षिक रेवेन्यू लगभग $300 मिलियन है।
जरूरी नोट: यह कंपनी अभी स्टॉक मार्केट (NSE या BSE) पर लिस्टेड नहीं है, इसलिए किसी भी पब्लिकली ट्रेडेड कंपनी से इसे न जोड़ें।
भविष्य की चुनौतियां और रिस्क
हालांकि यह टेक्नोलॉजी सुनने में काफी रोमांचक है, लेकिन इसके सामने दो बड़े रिस्क हैं:
- उपभोक्ता का भरोसा (Consumer Trust): क्या लोग खरीदारी जैसे संवेदनशील काम के लिए पूरी तरह AI पर भरोसा कर पाएंगे?
- Apple की पॉलिसी: चूंकि यह फीचर पूरी तरह से Apple के iOS 27 फ्रेमवर्क पर टिका है, इसलिए Apple की प्राइवेसी या AI पॉलिसी में कोई भी बदलाव सीधे तौर पर कंपनी के बिजनेस को प्रभावित कर सकता है।
अभी यह सर्विस शुरुआती स्टेज में है। कंपनी का लक्ष्य है कि अगले कुछ सालों में आधे से ज्यादा ग्राहक ट्रेडिशनल ऐप्स को छोड़कर AI एजेंट्स के जरिए शॉपिंग करने लगें, लेकिन इसकी कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि यूजर एक्सपीरियंस कितना स्मूथ रहता है।
