भारत की प्रमुख गिग कंपनियां अब डिलीवरी पार्टनर्स को ऐप के जरिए ही इनकम टैक्स फाइल करने की सुविधा दे रही हैं। Zomato, Swiggy और Zepto जैसे प्लेटफॉर्म्स के इस कदम से पार्टनर्स को TDS रिफंड क्लेम करने में मदद मिलेगी, साथ ही यह पार्टनर्स को जोड़े रखने की एक बड़ी रणनीति भी है।
गिग इकोनॉमी की बड़ी कंपनियां अब अपने डिलीवरी पार्टनर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को सीधे अपने ऐप्स में इंटीग्रेट कर रही हैं। इसका सीधा मकसद उन पार्टनर्स को टैक्स रिफंड दिलाने में मदद करना है, जिनका 1% TDS उनकी कमाई से काटा जाता है। जिन पार्टनर्स की सालाना आय टैक्स दायरे से कम है, उनके लिए यह रिफंड उनकी कमाई में एक बड़ा इजाफा साबित हो रहा है, साथ ही इससे उनका फॉर्मल फाइनेंशियल रिकॉर्ड भी तैयार हो रहा है।
आंकड़ों में तेजी
टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म ClearTax के अनुसार, गिग वर्कर्स की ओर से फाइलिंग का आंकड़ा 2.5 लाख (असेसमेंट ईयर 2023-24) से बढ़कर लगभग 11 लाख (2026-27) तक पहुंच गया है। Zomato और Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal ने बताया कि 2025-26 फाइनेंशियल ईयर में 2.1 लाख वर्कर्स ने टैक्स फाइल किया, जिससे ₹33.6 करोड़ का रिफंड क्लेम किया गया। वहीं, Swiggy के 50,000 से ज्यादा पार्टनर्स ने ₹6.5 करोड़ का रिफंड क्लेम किया है। इसके अलावा, Zepto ने 30,895 फाइलिंग के जरिए ₹4.9 करोड़ से ज्यादा का रिफंड क्लेम किया, जबकि Meesho के Valmo नेटवर्क ने ₹2 करोड़ के आसपास का आंकड़ा छुआ है।
रिटेंशन के लिए मास्टर प्लान
गिग प्लेटफॉर्म्स के लिए डिलीवरी स्टाफ का बार-बार काम छोड़ना (High Turnover) एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में वैल्यू-एडेड सर्विसेज देकर कंपनियां अपने पार्टनर्स को लंबे समय तक जोड़े रखने की कोशिश कर रही हैं। टैक्स रिफंड की सुविधा से न केवल पार्टनर्स का जुड़ाव गहरा होता है, बल्कि उन्हें औपचारिक क्रेडिट और लोन पाने में भी आसानी होती है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस और माइक्रो-क्रेडिट जैसी सुविधाएं भी जोड़ सकती हैं, जो इन वर्कर्स को प्लेटफॉर्म के इकोसिस्टम में मजबूती से बांधे रखेगा।
