German 'Mittelstand' का भारत पर दांव: GCC हब में **108%** का जोरदार उछाल

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
German 'Mittelstand' का भारत पर दांव: GCC हब में **108%** का जोरदार उछाल

जर्मनी की पारिवारिक स्वामित्व वाली 'Mittelstand' कंपनियां भारत में अपना विस्तार तेजी से कर रही हैं। अब भारत में **150** से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) काम कर रहे हैं, जो बेसिक सपोर्ट से हटकर हाई-वैल्यू R&D पर फोकस कर रहे हैं।

जर्मनी के मिड-साइज एंटरप्राइजेज, जिन्हें 'Mittelstand' के नाम से जाना जाता है, अब भारत का रुख कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह यूरोप में इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की भारी कमी है। अक्टूबर 2026 तक, 80 से अधिक जर्मन फर्मों ने भारत में 150 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित कर लिए हैं, जिनमें 1,30,000 से ज्यादा प्रोफेशनल काम कर रहे हैं। बीते 5 वर्षों में इसमें 108% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है।

भारतीय बाजार के लिए संकेत

हालांकि ये कंपनियां अक्सर निजी होती हैं और इनमें सीधे निवेश नहीं किया जा सकता, लेकिन इनका विस्तार भारत के आईटी और कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है। अब ये कंपनियां केवल बैक-ऑफिस काम ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च, क्लाउड कंप्यूटिंग और जटिल प्रोडक्ट डेवलपमेंट जैसे अहम काम भी भारत से करा रही हैं।

प्रमुख शहर और चुनौतियां

बेंगलुरु अभी भी पहली पसंद बना हुआ है, लेकिन पुणे, चेन्नई और हैदराबाद में भी हलचल बढ़ गई है। भारत के हर साल निकलने वाले 23 से 25 लाख STEM ग्रेजुएट्स इस ग्रोथ को और मजबूती दे रहे हैं। हालांकि, रेगुलेटरी जटिलताएं और ऑपरेशनल कॉस्ट का दबाव इन कंपनियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

आगे क्या?

निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की नजर अब बेंगलुरु में 7 अक्टूबर, 2026 को होने वाले 'इंडो-जर्मन इंजीनियरिंग समिट' पर है। उम्मीद है कि इस समिट में तकनीकी मानकों के तालमेल और टैलेंट मार्केट को लेकर नई रणनीति साझा की जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.