German Firms: साइबर हमलों से जर्मनी को €211 बिलियन का झटका, भारतीय कंपनियों पर भी मंडराया खतरा

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AuthorMehul Desai|Published at:
German Firms: साइबर हमलों से जर्मनी को €211 बिलियन का झटका, भारतीय कंपनियों पर भी मंडराया खतरा

जर्मनी की दिग्गज कंपनियां इस समय बड़े पैमाने पर स्टेट-स्पॉन्सर्ड साइबर हमलों का सामना कर रही हैं। इन हमलों से सालाना **€211 बिलियन** का नुकसान हो रहा है, जो भारतीय सप्लायर्स और मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय है।

जर्मनी का मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग सेक्टर इस समय एक बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। डिजिटल इंडस्ट्री एसोसिएशन Bitkom की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जासूसी और तोड़फोड़ जैसे साइबर अपराधों से जर्मनी को सालाना कम से कम €211 बिलियन का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि डिजिटल खतरे अब संगठित अपराध से कहीं आगे निकल चुके हैं।

हमलों का बदलता स्वरूप

हैरानी की बात यह है कि साइबर हमलों की घटनाओं में 37% का सीधा संबंध विदेशी इंटेलिजेंस एजेंसियों से पाया गया है। यह आंकड़ा पिछले साल 28% था, जो अब तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से चीन, रूस और ईरान का नाम सामने आया है। ये हमलावर अब 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) का इस्तेमाल कर डीपफेक और ऑटोमेटेड रोबोकॉल्स जैसे जटिल हमले कर रहे हैं, जिन्हें पकड़ना पुराना रैनसमवेयर हमलों की तुलना में काफी कठिन है।

भारतीय निवेशकों पर क्या होगा असर?

भारतीय ऑटोमोटिव, इंजीनियरिंग और फार्मा कंपनियां बड़े जर्मन कॉर्पोरेट्स के साथ गहराई से जुड़ी हुई हैं। यदि इन जर्मन कंपनियों का ऑपरेशन साइबर हमलों के कारण ठप होता है या डेटा चोरी होता है, तो इसका सीधा असर भारत के सप्लाई चेन पर पड़ेगा। इससे प्रोडक्शन में देरी और ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने का रिस्क पैदा हो गया है।

इंडियन IT कंपनियों के लिए मौका

एक तरफ जहां खतरा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय IT सर्विस कंपनियों के लिए नए दरवाजे भी खुल रहे हैं। केवल 43% जर्मन फर्में ही खुद को पूरी तरह सुरक्षित मानती हैं, जो कि पिछले साल 50% था। कंपनियां अपने IT सिक्योरिटी बजट को बढ़ाने के लिए मजबूर हैं, जो फिलहाल उनके कुल IT खर्च का केवल 18% है। भारतीय IT कंपनियां, जो साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड प्रोटेक्शन में माहिर हैं, उन्हें इस बढ़ते निवेश का फायदा मिल सकता है।

आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को उन कंपनियों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए जिनका एक्सपोसर जर्मनी के साथ ज्यादा है, ताकि वे देख सकें कि सप्लाई चेन की मजबूती के लिए कंपनियां क्या कदम उठा रही हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.