Gartner ने भविष्यवाणी की है कि 2028 तक 70% कंपनियां वेंडर-लेड एजेंटिक AI का इस्तेमाल बंद कर देंगी। इसकी मुख्य वजह बढ़ता खर्च और ऑपरेशनल कंट्रोल की कमी है, जो IT सर्विस कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल के लिए बड़ा रिस्क है।
'FDE वाशिंग' का बढ़ता संकट
Gartner की हालिया रिपोर्ट ने एंटरप्राइज AI मार्केट को हिलाकर रख दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई सर्विस प्रोवाइडर्स 'FDE वाशिंग' (Forward-Deployed Engineering washing) का सहारा ले रहे हैं। इसमें कंपनियां साधारण AI इंप्लीमेंटेशन के लिए प्रीमियम कंसल्टिंग फीस वसूल रही हैं, जो लंबे समय में कोई खास वैल्यू नहीं दे पा रही हैं।
क्या IT सेक्टर के लिए यह बड़ा रिस्क है?
टेक्नोलॉजी और IT सर्विस सेक्टर के निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि मौजूदा AI ग्रोथ स्टोरी में जोखिम छिपा हो सकता है। फिलहाल, कई IT कंपनियां AI ट्रांसफॉर्मेशन को अपने रेवेन्यू का मुख्य जरिया बता रही हैं और क्लाइंट्स को सिस्टम मैनेजमेंट के लिए लंबे समय तक खुद पर निर्भर रख रही हैं। लेकिन Gartner के अनुसार, यह मॉडल अंदर से खोखला हो सकता है।
जब कंपनियां खुद तकनीक नहीं सीखतीं और वेंडर पर निर्भर रहती हैं, तो वे महंगे और अक्षम कॉन्ट्रैक्ट्स में फंस जाती हैं। Gartner का अनुमान है कि 2028 तक मौजूदा FDE एंगेजमेंट्स में से 20% से भी कम कंपनियां अपनी कोर कैपेबिलिटी विकसित कर पाएंगी।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों के लिए अब यह देखना जरूरी है कि IT कंपनियां अपने AI कॉन्ट्रैक्ट्स को कैसे स्ट्रक्चर कर रही हैं। जो कंपनियां क्लाइंट्स को ट्रेनिंग देने और खुद की इंफ्रास्ट्रक्चर में AI को इंटीग्रेट करने पर फोकस कर रही हैं, वे भविष्य में ज्यादा मजबूत होंगी।
वहीं, जो कंपनियां केवल 'ओपन-एंडेड' सर्विस पर निर्भर हैं, उन्हें आने वाले समय में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अगर कॉर्पोरेट बजट में कटौती होती है या कंपनियां ROI (Return on Investment) की मांग करती हैं, तो ऐसी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
