Gartner की 2027 की आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, AI के दौर में सुरक्षा जोखिम अब और बढ़ गए हैं। इसके चलते अब कंपनियों को 'Passive' के बजाय सख्त 'Architectural Control' अपनाना होगा। भारतीय IT सेक्टर के लिए यह बदलाव R&D में बड़े निवेश और नई साइबर सुरक्षा सेवाओं की मांग पैदा करेगा।
IT सेक्टर के सामने नई चुनौतियां
Gartner की लेटेस्ट स्ट्रैटेजिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल एंटरप्राइजेज का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को संभालने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। अब तक कंपनियां केवल AI के प्रयोग पर ध्यान दे रही थीं, लेकिन अब वक्त 'Active Architectural Control' का है। भारतीय IT दिग्गजों जैसे TCS, Infosys, Wipro और HCL Technologies के लिए यह एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, क्योंकि क्लाइंट्स अब साधारण इंप्लीमेंटेशन से आगे बढ़कर जटिल साइबर सुरक्षा और गवर्नेंस मैनेजमेंट की सेवाएं मांगेंगे।
ऑटोनॉमस एजेंट्स और सुरक्षा का खतरा
रिपोर्ट एक बड़ी खामी की ओर इशारा करती है जिसे 'Architectural Vacuum' कहा गया है। मौजूदा समय में AI सिस्टम इतनी तेजी से तैनात किए जा रहे हैं कि मानव टीमें उनकी निगरानी भी नहीं कर पा रही हैं। इसका नतीजा यह है कि 2028 तक, एंटरप्राइजेज में होने वाली 25% साइबर ब्रीच (ब्रीच) ऑटोनॉमस एजेंट्स के गलत इस्तेमाल के कारण होगी। यह स्थिति भारतीय IT कंपनियों के लिए एक बड़ा बिजनेस अवसर भी है, क्योंकि क्लाइंट्स को इन खतरों से निपटने के लिए नए सुरक्षा ढांचे की जरूरत पड़ेगी।
'Sovereign Technology' का उदय
अगले कुछ वर्षों में 'Sovereign Technology' सबसे बड़ा ट्रेंड होगा। दुनिया भर की गैर-अमेरिकी संस्थाएं अब ऐसे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पर ध्यान दे रही हैं जो उन्हें किसी एक वेंडर के एकाधिकार (Vendor Lock-in) से बचा सके। वे जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता से बचने के लिए अपनी निर्भरता कम करना चाहती हैं। ऐसे में भारतीय IT कंपनियां जो वेंडर-एग्नोस्टिक समाधान दे सकती हैं, उनके पास ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने का सुनहरा मौका है।
R&D में निवेश की है भारी जरूरत
इंडस्ट्री अब केवल टेक्स्ट आधारित लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स से आगे बढ़कर 'Large Quantitative Models' की ओर बढ़ रही है। ये ऐसे मॉडल्स हैं जिन्हें खास तौर पर डेटा स्ट्रक्चर को प्रोसेस करने के लिए बनाया गया है। अब भविष्य की तकनीक में सफल होने के लिए भारतीय कंपनियों को केवल अपने मौजूदा प्लेटफॉर्म्स को बढ़ाने के बजाय, गणितीय सटीकता (Mathematical Precision) और डीप R&D पर निवेश करना होगा।
