ग्लोबल AI इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी मांग के कारण मेमोरी कंपोनेंट्स की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे स्मार्टफोन महंगे हो गए हैं। भारत में 2026 तक मोबाइल मार्केट में **12% से 15%** तक की गिरावट का अनुमान है, जिसे देखते हुए इंडस्ट्री ने सरकार से GST घटाने की अपील की है।
मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत का असर
पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर मची होड़ ने मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के सामने सप्लाई चेन का संकट खड़ा कर दिया है। GSMA के अनुसार, DRAM और NAND जैसे मेमोरी कंपोनेंट्स की लागत अब हैंडसेट बनाने के कुल खर्च का करीब 45% तक पहुंच गई है, जो पहले 15% से 20% के आसपास हुआ करती थी। इसका सीधा असर ये हो रहा है कि कंपनियां अब प्रीमियम डिवाइसेज पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं और बजट-फ्रेंडली फोन बाजार से गायब हो रहे हैं।
भारत पर कितना होगा असर?
भारत जैसे बड़े वॉल्यूम वाले बाजार के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। अनुमान है कि 2026 तक भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में 12% से 15% तक की भारी गिरावट आ सकती है। फोन महंगे होने के कारण आम उपभोक्ता या तो पुराने फोन को ही ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं या फिर सेकेंडरी मार्केट का रुख कर रहे हैं, जिससे कंपनियों की नई बिक्री चक्र धीमी पड़ गई है।
ICEA की सरकार से बड़ी मांग
इस संकट से निपटने के लिए इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने सरकार के सामने एक प्रस्ताव रखा है। इंडस्ट्री चाहती है कि मोबाइल हैंडसेट्स पर लगने वाले GST को मौजूदा 18% से घटाकर 5% कर दिया जाए। उनका मानना है कि टैक्स में यह कटौती ही आम आदमी की पहुंच में स्मार्टफोन को वापस ला सकती है।
निवेशक अब इस बात पर बारीक नजर रखे हुए हैं कि कंपनियां कैसे बिना अपने मुनाफे (Profit Margin) को घटाए इन बढ़ती लागतों को मैनेज करती हैं। साथ ही, सरकारी नीति में किसी भी बदलाव की खबर बाजार के लिए बड़े टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।
