गुजरात में **₹5,700 करोड़** के BharatNet प्रोजेक्ट का टेंडर विवादों में घिर गया है। टेंडर की कड़ी शर्तों और भारी-भरकम टर्नओवर की मांग पर इंडस्ट्री के जानकारों ने आपत्ति जताई है, जिससे प्रोजेक्ट में देरी का खतरा पैदा हो गया है।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
गुजरात सरकार की संस्था, Gujarat Fibre Grid Network Limited (GFGNL) ने डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए ₹5,700 करोड़ का टेंडर निकाला है। लेकिन, इसमें भाग लेने वाली कंपनियों के लिए ₹4,700 करोड़ का सालाना टर्नओवर दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। जानकारों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट की कुल लागत का लगभग 200% है, जो बहुत ज्यादा है।
सरकारी गाइडलाइन्स से टकराव
यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के प्रोक्योरमेंट मैनुअल के मुताबिक, किसी भी टेंडर के लिए वित्तीय पात्रता आम तौर पर कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का 30% से 50% के बीच होनी चाहिए। BSNL, जो इस प्रोजेक्ट के लिए सलाहकार की भूमिका में है, उसने भी साफ कहा है कि GFGNL की शर्तें केंद्र सरकार के नियमों के साथ मेल नहीं खाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कड़ी शर्तें केवल बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाती हैं और स्थानीय फर्मों को रेस से बाहर कर देती हैं।
क्या टेंडर होगा रद्द?
यह पहली बार नहीं है जब गुजरात सरकार का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट विवादों में आया है। अप्रैल 2025 में भी इसी तरह की शिकायतों के बाद सरकार को भारतनेट के तीसरे फेज का टेंडर रद्द करना पड़ा था। अब सबकी निगाहें गुजरात के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology) पर टिकी हैं कि क्या वे शर्तों में ढील देंगे या प्रोजेक्ट को फिर से कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
