GE Aerospace के बेंगलुरु स्थित टेक्नोलॉजी सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके एयरक्राफ्ट इंजन की सर्विसिंग का समय 5 दिन कम कर दिया है। प्रेडिक्टिव फोरकास्टिंग और ऑटोमेटेड इंस्पेक्शन टूल्स के ज़रिए कंपनी अपनी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) ऑपरेशन्स में तेज़ी ला रही है।
AI से इंजन सर्विसिंग में क्रांति
GE Aerospace अपने बेंगलुरु स्थित जॉन एफ. वेल्च टेक्नोलॉजी सेंटर में विकसित AI-संचालित टूल्स का उपयोग करके एयरक्राफ्ट इंजन की मरम्मत के समय को पांच दिनों तक कम कर रही है। इस सुधार से एयरलाइंस अपने प्लेन को तेज़ी से वापस उड़ान के लिए तैयार कर पाएंगी, जो एविएशन इंडस्ट्री की एक बड़ी समस्या का समाधान है। निवेशकों के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) जैसी सेवाएं ग्लोबल इंजन निर्माताओं के लिए हाई-मार्जिन प्रॉफिट का अहम ज़रिया हैं।
कैसे AI बदल रहा है तस्वीर?
भारत में स्थित यह रिसर्च सेंटर एक ऐसी प्रणाली का उपयोग कर रहा है जो किसी इंजन के रिपेयर फैसिलिटी में पहुंचने से पहले ही यह अनुमान लगा लेती है कि किन स्पेसिफिक पार्ट्स की ज़रूरत होगी। इन ज़रूरतों का सटीक अनुमान लगाकर, कंपनी इंजन के स्पेयर पार्ट्स का इंतज़ार करते हुए बेकार खड़े रहने वाले समय को कम कर रही है। इसके अलावा, सेंटर ने AI-इनेबल्ड ब्लेड इंस्पेक्शन टूल (BIT) भी विकसित किया है, जो टेक्नीशियन्स को स्टैंडर्डाइज्ड रिव्यू करने में मदद करता है और GEnx इंजनों के इंस्पेक्शन टाइम को लगभग 50% तक कम कर चुका है।
क्यों है यह निवेशकों के लिए ख़ास?
$210 बिलियन से ज़्यादा के इंजन ऑर्डर बैकलॉग वाली कंपनी के लिए, आफ्टरमार्केट सेगमेंट में एफिशिएंसी लंबे समय के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। जैसे-जैसे ग्लोबल एयरलाइंस इंजन की उपलब्धता की कमी का सामना कर रही हैं, मेंटेनेंस साइकिल को तेज़ी से पूरा करने की क्षमता GE Aerospace को सर्विस कॉन्ट्रैक्ट सुरक्षित करने और बनाए रखने में मदद करती है, साथ ही क्लाइंट के साथ मजबूत रिश्ते भी बने रहते हैं।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और भविष्य की राह
इन सुधारों के बावजूद, एविएशन सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। Rolls-Royce और Pratt & Whitney जैसे ग्लोबल प्रतिद्वंद्वी भी अपने मार्केट शेयर को बचाने के लिए AI-संचालित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और एडवांस्ड इंस्पेक्शन कैपेबिलिटीज में भारी निवेश कर रहे हैं। हालांकि ये डिजिटल टूल्स उत्पादकता बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन एविएशन इंडस्ट्री लगातार ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधाओं और कच्चे माल की कमी का सामना कर रही है, जो कंपनियों के लिए उत्पादन बढ़ाने या मरम्मत पूरी करने की गति को सीमित कर सकते हैं। कंपनी के ग्रोथ पर नज़र रखने वाले निवेशक यह देखेंगे कि क्या ये डिजिटल एफिशिएंसी गेन, व्यापक सेक्टर लागतों से निपटने और आने वाली तिमाहियों में प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने में कंपनी की मदद कर पाते हैं।
