Fujifilm ने गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर सामग्री बनाने के लिए **₹800 करोड़** के निवेश का ऐलान किया है। कंपनी ने Tata Electronics के साथ साझेदारी की है ताकि भारत में ही चिप निर्माण से जुड़ी जरूरी सामग्री का उत्पादन किया जा सके और आयात पर निर्भरता कम हो।
भारत में सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम को मजबूती
Fujifilm ने गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन में सेमीकंडक्टर मैटेरियल बनाने के लिए मल्टी-फेज निवेश की योजना बनाई है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य फोकस Tata Electronics के आने वाले चिप फैब्रिकेशन यूनिट को हाई-प्योरिटी केमिकल्स की सप्लाई करना है। कंपनी के मुताबिक, इस प्लांट का पहला चरण 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है।
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर जोर
Fujifilm सिर्फ अपना प्लांट नहीं लगा रही है, बल्कि भारतीय केमिकल निर्माताओं के साथ अपनी टेक्नोलॉजी और क्वालिटी कंट्रोल प्रोसेस भी साझा करेगी। सेमीकंडक्टर-ग्रेड सामग्री के लिए अत्यधिक शुद्धता मानकों की आवश्यकता होती है, और कंपनी लोकल सप्लायर्स को इन मानकों को पूरा करने में मदद करेगी। इसके अलावा, कंपनी भारत में एक एप्लीकेशन लैब और रिसर्च सेंटर खोलने की संभावना भी तलाश रही है ताकि स्थानीय इंजीनियरिंग टैलेंट को ट्रेनिंग दी जा सके।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां
प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में कंपनी 'केमिकल मैकेनिकल प्लानराइजेशन स्लरी' तकनीक को भारतीय बाजार में लाएगी, जो चिप वेफर्स की पॉलिशिंग के लिए बेहद जरूरी है। कंपनी का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में अपने कार्यबल को मौजूदा 10 से बढ़ाकर लगभग 70 कर्मचारियों तक ले जाना है।
हालांकि, इस मिशन की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है। सेमीकंडक्टर-ग्रेड केमिकल्स का उत्पादन तकनीकी रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण है, जहां शुद्धता का स्तर बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी है। साथ ही, इस निवेश का पूरा लाभ Tata Electronics के फैब फैसिलिटी के समय पर शुरू होने से जुड़ा है। किसी भी देरी का असर सीधे सप्लायर्स की डिमांड और फाइनेंशियल रिटर्न पर पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों की नजरें बनी रहेंगी।
