Tony Blair Institute की एक हालिया रिपोर्ट ने सरकारी डेटा मैनेजमेंट को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। अलग-अलग विभागों के बीच डेटा तालमेल न होने से वेलफेयर स्कीम्स में **4-7%** का लीकेज हो रहा है, जो भारत के महत्वाकांक्षी AI मिशन के लिए एक बड़ा रोडब्लॉक बन सकता है।
भारत ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है, लेकिन अब एक नई चुनौती सामने आई है जिसे 'डेटा साइलो' (Data Silos) कहा जा रहा है। अक्टूबर 2026 में जारी Tony Blair Institute की रिपोर्ट बताती है कि भले ही Aadhaar और Unified Payments Interface (UPI) जैसे सिस्टम बहुत बड़े हो गए हैं, लेकिन इनका डेटा अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच ही फंसा हुआ है। यह बिखराव न केवल सरकारी कामकाज की एफिशिएंसी कम कर रहा है, बल्कि देश के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) गोल्स के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।
डेटा के अभाव में भारी नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार, सही तालमेल न होने के कारण सरकारी वेलफेयर खर्च का 4% से 7% हिस्सा लीकेज की भेंट चढ़ जाता है। इसका मतलब है कि विभागों के डेटाबेस आपस में 'बात' नहीं करते, जिससे अरबों रुपयों का नुकसान हो रहा है। डेटा की सफाई (Data Cleansing) से पहले भी सरकार ने बड़े बचत किए हैं। जैसे PM-KISAN स्कीम में अपात्र लोगों को हटाने से ₹9,000 करोड़, LPG सब्सिडी में हेरफेर रोकने से ₹21,000 करोड़ और राशन कार्ड में फर्जी रिकॉर्ड्स हटाने से करीब ₹10,000 करोड़ की बचत हुई है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि सही डेटा प्रबंधन से कितना बड़ा फंड बचाया जा सकता है।
AI का भविष्य और डेटा की चुनौती
रिपोर्ट साफ चेतावनी देती है कि भारत का AI मिशन तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक इनपुट डेटा एरर-फ्री न हो। बिना इंटर-डिपार्टमेंट डेटा शेयरिंग के, सरकार की AI स्ट्रैटेजी गलत नतीजों को और बढ़ा सकती है। अब समय 'डिजिटल स्केल' से आगे बढ़कर 'डेटा पावर' बनने का है, जिसके लिए एक इंटेलिजेंस लेयर की जरूरत है।
DPI 3.0 की ओर कदम
इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ 'स्टेट डेटा बैलेंस शीट' मॉडल अपनाने की बात कर रहे हैं। इसे 'DPI 3.0' कहा जा रहा है, जिसका लक्ष्य सरकारी डेटा को एक समान स्टैंडर्ड पर लाना है। अगर यह सफल होता है, तो न केवल पब्लिक स्पेंडिंग बेहतर होगी, बल्कि IT सेक्टर, SaaS (सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस) और डेटा एनालिटिक्स कंपनियों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। अब देखना यह है कि क्या सरकार इन विभागीय दीवारों को तोड़कर एक इंटीग्रेटेड डिजिटल इकोसिस्टम बनाने में सफल हो पाती है।
