फ्लोरिडा की फेडरल अपील्स कोर्ट ने एक अहम फैसले में राज्य के उस कानून को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत **14 साल** से कम उम्र के बच्चों का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाना प्रतिबंधित होगा। इस फैसले से टेक कंपनियों पर सख्त एज-वेरिफिकेशन लागू करने का भारी दबाव बढ़ गया है।
कोर्ट का फैसला और इसके मायने
11वीं यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने फ्लोरिडा के H.B. 3 कानून को लागू करने की अनुमति दे दी है। इस कानून का मुख्य लक्ष्य उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाम लगाना है, जो इन्फिनिट स्क्रॉलिंग और वीडियो ऑटोप्ले जैसे 'एडिक्टिव फीचर्स' का इस्तेमाल करते हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि यह कानून अभिव्यक्ति की आजादी (फर्स्ट अमेंडमेंट) के खिलाफ नहीं, बल्कि तकनीक के 'आर्किटेक्चर' को रेगुलेट करने वाला कदम है।
टेक कंपनियों पर असर (Compliance Burden)
अब Meta Platforms, TikTok और Snap Inc. जैसी दिग्गज कंपनियों को सख्त एज-वेरिफिकेशन सिस्टम बनाना होगा। इससे कंपनी के ऑपरेशनल खर्च में बढ़ोतरी तय है। अगर कंपनियां इन मानकों पर खरी नहीं उतरती हैं, तो उन्हें भारी पेनल्टी और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है।
Snap Inc. की बढ़ती मुश्किलें
Snap Inc. के लिए यह फैसला एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। कंपनी पर बच्चों के अकाउंट को लेकर जो मामले चल रहे थे, उन्हें फेडरल कोर्ट से हटाकर स्टेट कोर्ट में भेज दिया गया है, जिससे कंपनी के लिए कानूनी बचाव का दायरा सीमित हो गया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह निर्णय टेक सेक्टर के लिए एक नई 'रेगुलेटरी रिस्क' की शुरुआत है। अब बाजार के जानकार इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या अन्य राज्य भी इसी तरह के कानून अपनाएंगे, क्योंकि अलग-अलग राज्यों में अलग नियमों का होना कंपनियों के लिए अनुपालन (compliance) का खर्च और बढ़ा सकता है।
