सर्विलांस टेक कंपनी Flock Safety अपने वर्कफोर्स में **18%** की कटौती कर रही है, जिससे लगभग **270** कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। कंपनी अपने लाइसेंस प्लेट-रीडिंग नेटवर्क को लेकर बढ़ते विरोध और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि यह एक प्राइवेट कंपनी है और भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है।
बढ़ता विरोध और बिजनेस मॉडल पर दबाव
Flock Safety, जो अपने बड़े पैमाने पर लाइसेंस प्लेट-रीडिंग सर्विलांस नेटवर्क के लिए जानी जाती है, ने आधिकारिक तौर पर वर्कफोर्स में करीब 18% की कटौती की पुष्टि की है। सितंबर 2026 के अंत में एक वॉलंटरी बायआउट प्रोग्राम खत्म होने के बाद यह निर्णय लिया गया है। कंपनी का यह कदम सरकारी और सार्वजनिक स्तर पर बढ़ रही सख्ती के बीच अपने बिजनेस मॉडल को फिर से ढालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
प्राइवेसी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां
कंपनी को प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स और कम्युनिटी ग्रुप्स से भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य चिंता मास सर्विलांस, डेटा सिक्योरिटी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा इस प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल को लेकर है। इसका सीधा असर बिजनेस पर दिख रहा है, क्योंकि कई बड़े नगर पालिकाओं और पुलिस विभागों ने कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू न करने का फैसला किया है। इसके अलावा, सिस्टम में तकनीकी खामियां—जैसे कि कैमरा फीड का असुरक्षित होना और गलत पहचान से गलत पुलिस हस्तक्षेप—कंपनी की छवि को और नुकसान पहुंचा रही हैं। कुछ क्षेत्रों में सर्विलांस हार्डवेयर को नष्ट करने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे कंपनी पर लागत का बोझ बढ़ गया है।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
Flock Safety का नेटवर्क 1,20,000 से ज्यादा कैमरों और 4,800 से ज्यादा पुलिस एजेंसियों तक फैला है, लेकिन यह कंपनी वेंचर कैपिटल द्वारा समर्थित एक प्राइवेट फर्म है। यह कंपनी भारतीय शेयर बाजारों, यानी NSE या BSE पर उपलब्ध नहीं है। सर्विलांस टेक्नोलॉजी सेक्टर में यह घटना दिखाती है कि तेजी से तकनीक फैलाने और जन-निजता (Public Privacy) के बीच टकराव बढ़ रहा है। भविष्य में कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कैसे सुरक्षा खामियों को दूर करती है और नगर पालिकाओं का भरोसा दोबारा जीतती है।
