ग्लोबल फैमिली ऑफिस अब पारंपरिक वेंचर कैपिटल (VC) फंड्स से हटकर सीधे AI कंपनियों के शेयरों में निवेश कर रहे हैं। सेकेंडरी मार्केट के जरिए हो रही यह हलचल निवेशकों को कंट्रोल तो देती है, लेकिन इसके साथ वैल्यूएशन और लिक्विडिटी का बड़ा रिस्क भी जुड़ा है।
बड़ी प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट फर्म्स, जिन्हें 'फैमिली ऑफिस' कहा जाता है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में पैसा लगाने का तरीका बदल रही हैं। अब तक का चलन यह था कि वे अपना पैसा वेंचर कैपिटल (VC) फंड्स को सौंपते थे, जहां फंड मैनेजर यह तय करते थे कि किस स्टार्टअप में निवेश करना है। लेकिन अब अमीर परिवार खुद अपनी निवेश रणनीति तय कर रहे हैं, जिससे उन्हें अपनी पसंद की कंपनियों पर बेहतर नियंत्रण मिल रहा है।\n\n### सेकेंडरी मार्केट का नया ट्रेंड\nयह बदलाव मुख्य रूप से 'सेकेंडरी मार्केट' ट्रांजेक्शन के जरिए हो रहा है। इसमें निवेशक किसी कंपनी को नया कैपिटल देने के बजाय, मौजूदा शेयरधारकों (जैसे पुराने कर्मचारी या शुरुआती निवेशकों) से सीधे शेयर खरीद लेते हैं। इससे फैमिली ऑफिस OpenAI और Anthropic जैसी स्थापित कंपनियों पर सीधा दांव लगा सकते हैं, जो पहले से ही मार्केट में अपनी पहचान बना चुकी हैं।\n\n### भारतीय निवेशकों के बीच भी हलचल\nयह ग्लोबल ट्रेंड अब भारत में भी जोर पकड़ रहा है। अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ (UHNW) व्यक्ति और भारतीय फैमिली ऑफिस भी अब केवल पब्लिक मार्केट तक सीमित न रहकर, टेक और ग्रोथ-स्टेज की अनलिस्टेड कंपनियों में सीधे निवेश के अवसर तलाश रहे हैं।\n\n### निवेश के साथ जुड़े बड़े रिस्क\nइस रणनीति में जोखिम भी कम नहीं हैं:\n\n* वैल्यूएशन रिस्क: वर्तमान में AI स्टार्टअप्स की वैल्यूएशन आसमान छू रही है। यदि ये कंपनियां उम्मीद के मुताबिक रेवेन्यू जनरेट नहीं कर पाईं, तो निवेशकों के पैसे डूबने का खतरा है।\n* लिक्विडिटी रिस्क: शेयर बाजार (NSE या BSE) के विपरीत, प्राइवेट कंपनियों के शेयर आसानी से बेचे नहीं जा सकते। अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ी, तो ये शेयर जल्दी कैश नहीं हो सकते।\n* कंसंट्रेशन रिस्क: एक या दो चुनिंदा कंपनियों में निवेश करना, डाइवर्सिफाइड VC फंड में पैसा लगाने से कहीं ज्यादा रिस्की है। यदि वह एक कंपनी संघर्ष करती है, तो पूरा निवेश पोर्टफोलियो खतरे में पड़ सकता है।
