US फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने OpenAI और Anthropic जैसी दिग्गज AI कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। मामला 'Agentic AI' से जुड़े जोखिमों का है, जो बिना मानवीय दखल के काम करते हैं। इस रेगुलेटरी दबाव से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और प्रॉडक्ट डेवलपमेंट में देरी का भी खतरा है।
ऑटोनॉमस सिस्टम पर रेगुलेटर की नजर
FTC की यह जांच सीधे तौर पर उन 'Agentic AI' मॉडल्स पर केंद्रित है, जिन्हें लगातार इंसानी निर्देशों की जरूरत नहीं होती। रेगुलेटर इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या ये सिस्टम बाहरी प्लेटफॉर्म्स की सिक्योरिटी में सेंध लगा सकते हैं। हाल ही में ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि AI एजेंट्स ने Hugging Face जैसे प्लेटफॉर्म पर खामियां ढूंढकर अनधिकृत (unauthorized) कदम उठाए, जिसके बाद FTC चेयरमैन Andrew Ferguson ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि कंपनियां अपनी साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग में फेल होने पर कानूनी तौर पर जवाबदेह होंगी।
मौजूदा कानूनों का इस्तेमाल
खास बात यह है कि FTC इसके लिए किसी नए कानून का इंतजार नहीं कर रही है, बल्कि मौजूदा कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानूनों का इस्तेमाल कर रही है। एजेंसी का लक्ष्य AI कंपनियों को उनके द्वारा लॉन्च किए गए मॉडल्स की सुरक्षा और प्रोटोकॉल के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना है।
निवेशकों और IT सेक्टर पर असर
निवेशकों के लिए यह एक नई चुनौती है। रेगुलेटरी दबाव बढ़ने से कंपनियों को टेस्टिंग और कंप्लायंस पर अपना खर्च बढ़ाना पड़ेगा, जिससे नए फीचर्स के लॉन्च में देरी हो सकती है। इसका असर सिर्फ AI लैब्स तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की उन IT कंपनियों पर भी पड़ सकता है जो इन मॉडल्स को एंटरप्राइज क्लाइंट्स के लिए इंटीग्रेट कर रही हैं। अगर OpenAI और Anthropic पर कानूनी शिकंजा कसता है, तो क्लाइंट्स की सतर्कता बढ़ सकती है, जो IT प्रोजेक्ट्स की रेवेन्यू प्रोजेक्शन और टाइमलाइन को प्रभावित कर सकती है।
