US की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एयर स्पेस इंटेलिजेंस के साथ **$875 मिलियन** का **12** साल का करार किया है। इस डील का मकसद SMART AI प्लेटफॉर्म के जरिए एयर ट्रैफिक और पुरानी इन्फ्रास्ट्रक्चर की समस्याओं को सुलझाना है।
अमेरिकी एविएशन रेगुलेटर FAA ने एयर स्पेस इंटेलिजेंस (Air Space Intelligence) के साथ $875 मिलियन के एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य 'SMART' (Strategic Management of Airspace, Routes and Trajectories) नाम के AI सॉफ्टवेयर को लागू करना है। यह सिस्टम एयर ट्रैफिक कंट्रोल में आने वाली दिक्कतों और स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है।
कैसे काम करेगा यह AI सिस्टम?
यह प्लेटफॉर्म रीयल-टाइम डेटा जैसे कि एयरपोर्ट की क्षमता, मौसम के पैटर्न और फ्लाइट शेड्यूल को प्रोसेस करेगा। प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स (Predictive Analytics) का उपयोग करते हुए, यह सॉफ्टवेयर ट्रैफिक की भीड़ और फ्लाइट के बीच टकराव को पहले ही भांप लेगा। इससे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को निर्णय लेने में मदद मिलेगी, जिससे मैन्युअल काम का बोझ कम होगा और फ्लाइट्स की आवाजाही बेहतर होगी।
एविएशन सेक्टर के लिए इसके मायने
ग्लोबल स्तर पर एविएशन सेक्टर अब डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। भारत के संदर्भ में भी देखें, तो 'एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (AAI) अपने सिस्टम को अपग्रेड करने पर जोर दे रही है। FAA का यह कदम दुनिया भर के रेगुलेटर्स के लिए एक बेंचमार्क बन सकता है।
चुनौतियां और रिस्क
हालांकि यह टेक्नोलॉजी दक्षता बढ़ाएगी, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) और एल्गोरिदम की सटीकता से जुड़ी चुनौतियां भी हैं। किसी भी तकनीकी खराबी या गलत डेटा इनपुट से बड़े ऑपरेशनल रिस्क पैदा हो सकते हैं। इसीलिए, शुरुआती दौर में इसे केवल वाशिंगटन, डी.सी. के मेट्रोपॉलिटन इलाके में ही टेस्ट किया जाएगा ताकि सिस्टम की विश्वसनीयता को परखा जा सके।
