टेलीकॉम दिग्गज Ericsson ने अब भारत में मैन्युफैक्चर किए गए 5G एंटेना का निर्यात (Export) शुरू कर दिया है। यह कदम कंपनी की रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है, जिसमें भारत अब एक ग्लोबल सप्लाई हब बनकर उभर रहा है।
भारत में तैयार टेलीकॉम इक्विपमेंट अब यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों का सफर तय कर रहे हैं। Ericsson ने हरियाणा के मानेसर में VVDN Technologies के साथ मिलकर अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को एक ग्लोबल हब में बदल दिया है।\n\n### उत्पादन के बड़े आंकड़े\n\nसाल 2025 के मध्य से इस साझेदारी ने अब तक 15,000 से ज्यादा एंटेना और 2.5 करोड़ से अधिक नेटवर्क कंपोनेंट्स का निर्माण किया है। खास बात यह है कि इन एंटेना का 50% से ज्यादा हिस्सा अब पूरी तरह से स्थानीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। भारत में 95% मिड-बैंड 5G कवरेज ने कंपनी को अपनी नई तकनीक टेस्ट करने के लिए एक बड़ा आधार दिया है।\n\n### आरएंडडी (R&D) पर फोकस\n\nसिर्फ असेंबली ही नहीं, कंपनी भारत में हाई-एंड रिसर्च पर भी जोर दे रही है। भारत में मौजूद 22,000 कर्मचारियों में से 2,200 सीधे तौर पर आरएंडडी (R&D) में काम कर रहे हैं। इनका फोकस AI-रेडी नेटवर्क, चिप डिजाइन और 6G तकनीक पर है।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी\n\nग्लोबल टेलीकॉम सेक्टर इस वक्त दबाव में है। निवेशकों को यह समझना होगा कि कंपनियों को आरएंडडी पर भारी खर्च और प्रॉफिट मार्जिन के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। कंपोनेंट की बढ़ती कीमत, करेंसी में उतार-चढ़ाव और लाइसेंसिंग रेवेन्यू में अस्थिरता कंपनी के मुनाफे पर असर डाल सकती है। आगे चलकर कंपनी सरकार की PLI स्कीम के जरिए मिलने वाले फायदों पर भी नजर रखे हुए है, जो इसके प्रॉफिटेबिलिटी को आगे दिशा देने में मदद कर सकता है।
