कंपनियां AI से काम तो तेजी से निपटा रही हैं, लेकिन यह तेजी मुनाफे में नहीं बदल पा रही है। बिजनेस जगत को **$161 बिलियन** के 'AI फ्रैगमेंटेशन टैक्स' का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि डेटा का सही ढांचा न होने से पूरी ट्रांसफॉर्मेशन प्रक्रिया अटक गई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने के मामले में कॉरपोरेट जगत एक बड़े मोड़ पर खड़ा है। कर्मचारी कोडिंग, डॉक्यूमेंटेशन और रिपोर्टिंग जैसे कामों में AI का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इसका असर कंपनी के ओवरऑल फाइनेंशियल रिजल्ट्स में नहीं दिख रहा है। Atlassian की हालिया रिसर्च के मुताबिक, जहां व्यक्तिगत प्रोडक्टिविटी में 33% का उछाल आया है, वहीं बिजनेस प्रोसेस का ट्रांसफॉर्मेशन अभी भी महज 3-4% की रफ्तार से ही चल रहा है।
क्या है 'AI फ्रैगमेंटेशन टैक्स'?
इस गैप के कारण कंपनियों को हर साल करीब $161 बिलियन का 'AI फ्रैगमेंटेशन टैक्स' चुकाना पड़ रहा है। मुख्य समस्या AI का अलग-अलग विभागों (Silos) में इस्तेमाल होना है। जब एक विभाग AI से तेजी से काम करता है, लेकिन फाइनेंस या लीगल जैसे विभाग पुराने और धीमे तरीके अपनाते हैं, तो काम के पेंडिंग प्रोजेक्ट्स का ढेर लग जाता है। सर्वे में शामिल सिर्फ 6% एग्जीक्यूटिव्स ही इस बात से आश्वस्त हैं कि उनका AI पर खर्च सीधे तौर पर रेवेन्यू बढ़ाने या क्वालिटी सुधारने में काम आ रहा है। भारतीय निवेशकों के लिए यह संकेत है कि IT सर्विसेज सेक्टर की क्लाइंट कंपनियां अब अपने AI बजट को फिर से रिव्यू कर सकती हैं।
डेटा की नींव सबसे जरूरी
आज के दौर में सिर्फ पावरफुल AI मॉडल होना ही काफी नहीं है, बल्कि कंपनी का अपना डेटा कितना व्यवस्थित है, यह बड़ी चुनौती बन गया है। लगभग 69% कर्मचारियों का मानना है कि उनकी कंपनियों का डेटा सिस्टम अभी AI के लिए तैयार नहीं है। कंपनियां बिना डेटा की सफाई किए सिर्फ सॉफ्टवेयर लाइसेंस खरीदे जा रही हैं, जो कि एक बड़ी भूल साबित हो रही है।
खर्च करने के तरीके में बदलाव
आने वाले समय में कंपनियों को अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है। अब केवल सॉफ्टवेयर लाइसेंस खरीदने के बजाय, ध्यान इंटरनल वर्कफ्लो, टीम के तालमेल और बेहतर नॉलेज सिस्टम बनाने पर होगा। जैसे-जैसे मशीनें दोहराव वाले काम संभालेंगी, इंसानी स्ट्रेटजी और प्रॉब्लम सॉल्विंग की वैल्यू बढ़ेगी। निवेशकों को अब इन कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखनी चाहिए कि वे शुरुआती AI एफिशिएंसी को कैसे ठोस मुनाफे या लागत में कटौती (Cost saving) में बदल पा रही हैं।
