गुरुग्राम की कंपनी ElevenX Capital ने अपने एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को नौकरी शुरू करने के महज़ दो दिन बाद ही निकाल दिया। कंपनी का कहना है कि पर्सनालिटी टेस्ट में न्यूट्रल पाए जाने के कारण यह फैसला लिया गया। इस घटना से हायरिंग के तरीकों पर सवाल उठ रहे हैं।
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नौकरी पर नियुक्ति के 2 दिन बाद ही कंपनी ने दिखाया बाहर का रास्ता
गुरुग्राम की कंपनी ElevenX Capital एक अजीबोगरीब मामले की वजह से चर्चा में है। एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को नौकरी पर रखने के महज़ दो दिन बाद ही कंपनी ने यह कहकर निकाल दिया कि उसका पर्सनालिटी टेस्ट रिजल्ट 'न्यूट्रल' आया है।
क्या है पूरा मामला?
डेवलपर का कहना है कि उसने कंपनी के सभी टेक्निकल इंटरव्यू राउंड क्लियर कर लिए थे और ऑफर लेटर भी मिल गया था। कंपनी की प्री-एम्प्लॉयमेंट प्रोसेस के तहत उसने एक कल्चर और पर्सनालिटी असेसमेंट टेस्ट भी दिया था, जिसे वह एक सामान्य प्रक्रिया मान रहा था। पिछले कंपनी से इस्तीफा देकर और गुरुग्राम शिफ्ट होने के बाद जब उसने ElevenX Capital में ज्वाइन किया, तो दूसरे ही दिन उसे HR डिपार्टमेंट ने मीटिंग के लिए बुलाया।
मीटिंग में उसे बताया गया कि पर्सनालिटी टेस्ट में उसका प्रोफाइल 'न्यूट्रल' पाया गया है, जबकि कंपनी एक्सट्रोवर्ट (मिलनसार) स्वभाव वाले कैंडिडेट्स को प्राथमिकता देती है। इसी के चलते उसकी नौकरी तत्काल प्रभाव से खत्म की जा रही है।
हायरिंग के तरीकों पर उठे सवाल
यह मामला इस बात पर सवाल खड़े करता है कि क्या किसी कर्मचारी को नौकरी पर रखने के बाद, खासकर जब वह नई जगह शिफ्ट हो चुका हो, केवल एक पर्सनालिटी टेस्ट के आधार पर निकाला जा सकता है? आमतौर पर ऐसे टेस्ट स्क्रीनिंग के दौरान उम्मीदवार को शॉर्टलिस्ट करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन इस मामले में कंपनी ने नियुक्ति के बाद ऐसा कदम उठाया है।
जानकारों का कहना है कि इस तरह की प्रथाएं कंपनियों के लिए महंगी पड़ सकती हैं, क्योंकि इससे कर्मचारियों का भरोसा उठता है, रिक्रूटमेंट कॉस्ट बढ़ती है और कंपनी की इमेज पर भी बुरा असर पड़ सकता है। यह घटना बताती है कि कंपनियों को अपनी हायरिंग और छंटनी की प्रक्रियाओं में ज़्यादा पारदर्शिता और तर्कसंगतता लाने की ज़रूरत है।
