Sortmyprep: AI ट्यूटर के लिए ₹2.9 करोड़ जुटाए, अब CBSE-ICSE पर भी फोकस!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Sortmyprep: AI ट्यूटर के लिए ₹2.9 करोड़ जुटाए, अब CBSE-ICSE पर भी फोकस!

एजुकेशन टेक्नोलॉजी (Edtech) स्टार्टअप Sortmyprep ने AI ट्यूटर को बेहतर बनाने और CBSE व ICSE जैसे भारतीय बोर्डों को कवर करने के लिए **$350,000** (लगभग **₹2.9 करोड़**) की प्री-सीड फंडिंग जुटाई है। BITS Pilani से इनक्यूबेट हुई यह कंपनी अब भारतीय मार्केट पर बड़ा दांव लगाने को तैयार है।

AI लर्निंग और सिलेबस को कैसे करेंगे स्केल?

Sortmyprep, जो ZKAP Edtech Service Private Limited चलाती है, ने हाल ही में $350,000 (लगभग ₹2.9 करोड़) की प्री-सीड फंडिंग सफलतापूर्वक हासिल की है। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपनी AI टेक्नोलॉजी को और मजबूत करने और अपने सिलेबस को CBSE और ICSE बोर्ड तक फैलाने में करेगी।

यह स्टार्टअप, जिसे BITS Pilani के बिजनेस इनक्यूबेटर PIEDS का भी सपोर्ट हासिल है, अब डोमेस्टिक और इंटरनेशनल दोनों बाजारों में अपनी पैठ बढ़ाना चाहता है।

किसने किया निवेश?

इस फंडिंग राउंड में कई बड़े इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स ने हिस्सा लिया। इनमें Rustomjee Group के चेयरमैन Boman Irani और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड boAt के को-फाउंडर Sameer Mehta शामिल हैं। इनके अलावा OneAssist के Subrat Pani, HG Insights के Rohini Kasturi, और London Stock Exchange Group के Ranjit Pawar जैसे इंडस्ट्री के दिग्गजों ने भी निवेश किया है।

AI ट्यूटर 'sorty' का कमाल

Sortmyprep का मुख्य प्रोडक्ट 'sorty' नाम का एक कन्वर्सेशनल AI ट्यूटर है, जो 24/7 स्टूडेंट्स के डाउट सॉल्व करता है। यह रियल-टाइम में स्टूडेंट्स के जवाबों का एनालाइज करके पर्सनलाइज्ड स्टडी प्लान बनाता है, ताकि सीखने में आ रही कमियों को दूर किया जा सके। पहले कंपनी IB और IGCSE जैसे इंटरनेशनल करिकुलम पर फोकस कर रही थी, लेकिन अब नए फंड्स के ज़रिए CBSE और ICSE को भी अपने प्लेटफॉर्म पर लाएगी।

बिजनेस मॉडल और मार्केट पोजिशन

Ananya Pritam, Aryaman Adhikary, और Naman Kothari द्वारा फाउंडेड इस कंपनी की मौजूदगी फिलहाल 15 से ज़्यादा देशों में है। कंपनी की यूजर एक्विजिशन स्ट्रेटेजी काफी दिलचस्प है - 71% यूजर ग्रोथ ऑर्गेनिक रेफरल्स और वर्ड-ऑफ-माउथ से आई है, न कि पेड मार्केटिंग से।

हालांकि, निवेशकों को इस बात पर ध्यान देना होगा कि CBSE और ICSE जैसे कॉम्पिटिटिव इंडियन बोर्ड्स में पैर जमाना एक बड़ी चुनौती होगी। कंपनी को यह साबित करना होगा कि वह बड़े पैमाने पर भी अपनी एक्यूरेसी और स्टूडेंट आउटकम्स को बनाए रख सकती है।

जैसे-जैसे कंपनी अपने शुरुआती निश (niche) फोकस से हटकर बड़े मार्केट सेगमेंट की ओर बढ़ रही है, सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रोडक्ट एक्सपेंशन को लागू करना होगी। इन्वेस्टर्स इस बात पर नज़र रखेंगे कि कंपनी इस नए सिलेबस डेटा को तैयार करने और अपने AI ट्यूटर की क्वालिटी बनाए रखने के लिए कैपिटल को कितनी कुशलता से मैनेज करती है। आने वाले समय में कंपनी का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह भारतीय एडटेक स्पेस के स्थापित प्लेयर्स से कैसे मुकाबला करती है और क्या मौजूदा ऑर्गेनिक एडॉप्शन रेट्स एक्सपेंशन के इस अगले फेज में भी बरकरार रह पाते हैं।

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