EY India की एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि एआई (AI) अपनाने वाली केवल **23%** कंपनियां ही इसका ठोस रिटर्न देख पा रही हैं, जबकि **44%** कंपनियों को कोई खास फायदा नहीं मिल रहा है। यह निवेशकों के लिए एक चेतावनी है कि तकनीक से ज्यादा डेटा की क्वालिटी मायने रखती है।
एआई निवेश का 'रियलिटी चेक'
EY India की हालिया रिपोर्ट 'Demystifying AI in customer service' ने बाजार की चकाचौंध के पीछे के सच को सामने रखा है। डेटा के मुताबिक, जो कंपनियां 'Achievers' की श्रेणी में हैं, उन्होंने एआई को अपने कोर ऑपरेशन्स के साथ गहराई से जोड़ा है, जिससे उन्हें रेवेन्यू और प्रोडक्टिविटी में 50% से ज्यादा का सुधार देखने को मिला है।
कंपनियों का वर्गीकरण और जोखिम
रिपोर्ट में कंपनियों को तीन हिस्सों में बांटा गया है:
- Achievers (23%): ये वे कंपनियां हैं जो लंबे समय से डेटा की क्वालिटी और गवर्नेंस पर काम कर रही हैं।
- Challengers (33%): इन्हें एआई से मध्यम स्तर का ही फायदा मिल रहा है।
- Aspirants (44%): इन कंपनियों को एआई निवेश से नगण्य (negligible) रिटर्न मिल रहा है।
इसका सीधा मतलब यह है कि सिर्फ चैटबॉट या एआई टूल्स खरीद लेने से बॉटम-लाइन में ग्रोथ नहीं आती। जो कंपनियां बिना डेटा क्लीनिंग के एआई में पैसा झोंक रही हैं, वे अपनी कैपिटल को खतरे में डाल रही हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को उन कंपनियों से सावधान रहने की जरूरत है जो केवल एआई के टूल्स के नंबर गिनवा रही हैं, न कि उसके इंटीग्रेशन पर काम कर रही हैं। बिना किसी स्ट्रक्चर्ड फ्रेमवर्क के एआई को जल्दी अपनाने से गवर्नेंस की दिक्कतें, सिक्योरिटी रिस्क और रेगुलेटरी हेड्स पैदा हो सकते हैं, जो भविष्य में मुनाफे पर चोट करेंगे। याद रखिए, एआई एक लंबी दौड़ है, कोई रातों-रात अमीर बनने की स्कीम नहीं।
