EY India की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। केवल **23%** कंपनियां ही AI का सही इस्तेमाल करके अपने कस्टमर सर्विस परफॉरमेंस (KPI) में **50%** से ज्यादा का उछाल लाने में कामयाब रही हैं।
EY India की ताजा रिपोर्ट 'Demystifying AI in customer service' ने कॉर्पोरेट जगत में एक बड़ी खाई की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों का एक छोटा सा वर्ग जिसे 'Achievers' कहा गया है, वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके अपने परफॉरमेंस मेट्रिक्स में 50% से ज्यादा का सुधार कर रहे हैं। यह सुधार रेवेन्यू, कस्टमर एक्सपीरियंस और एजेंट की प्रोडक्टिविटी जैसे अहम क्षेत्रों में साफ दिख रहा है।
अचीवर्स वर्सेस एस्पिरेंट्स का अंतर
रिपोर्ट में कंपनियों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है। सिर्फ 23% कंपनियां 'Achievers' हैं, जिन्होंने AI को अपने बिजनेस के मूल ढांचे (core processes) में शामिल कर लिया है। वहीं 33% 'Challengers' हैं और बाकी 44% 'Aspirants' हैं, जो अभी भी सिर्फ टेस्टिंग के दौर में अटके हुए हैं।
निवेशकों के लिए यह रिपोर्ट एक अहम सबक है। केवल AI अपनाने की घोषणा करना काफी नहीं है; असल फायदा उन्हें मिल रहा है जो टेक्नोलॉजी को पूरी ऑपरेशनल चेन में इंटीग्रेट कर रहे हैं।
कंपनियां क्यों पिछड़ रही हैं?
बाकी 77% कंपनियों के पीछे रहने की वजह सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि ढांचागत (structural) समस्याएं हैं। खराब डेटा क्वालिटी, बिखरे हुए इंटरनल प्रोसेस और कमजोर गवर्नेंस फ्रेमवर्क इनकी सबसे बड़ी रुकावटें हैं। इसके अलावा, रेगुलेटरी कंप्लायंस और पुरानी वर्क कल्चर भी AI के रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) को प्रभावित कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को अब कंपनियों के सिर्फ AI 'हाइप' पर नहीं जाना चाहिए। जो कंपनियां डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस पर खर्च कर रही हैं, वही लंबी रेस में आगे रहेंगी। आने वाले क्वार्टर्स में उन कंपनियों पर नजर रखें जो टिकट हैंडलिंग टाइम में कमी और बेहतर ऑपरेशनल मार्जिन जैसे ठोस नतीजे पेश कर रही हैं।
