EU का बड़ा फैसला: बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर उम्र की सीमा तय होगी, माता-पिता की निगरानी ज़रूरी

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AuthorNeha Patil|Published at:
EU का बड़ा फैसला: बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर उम्र की सीमा तय होगी, माता-पिता की निगरानी ज़रूरी

यूरोपियन यूनियन (EU) बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। EU 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल पर उम्र की सीमा तय करने वाले नए नियमों का प्रस्ताव रखने वाला है। इस नए नियम के तहत, छोटे बच्चों को माता-पिता की निगरानी में ही इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने की इजाज़त होगी।

माता-पिता की निगरानी में ही होगा इस्तेमाल

यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट, उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संकेत दिया है कि गर्मियों की छुट्टियों के बाद इस प्रस्ताव को पेश किया जाएगा। इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाना है। प्रस्तावित ढांचे के तहत, 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पहुंच बनाने के लिए माता-पिता, अभिभावकों या शिक्षकों की सक्रिय निगरानी की ज़रूरत होगी। इसमें एक टियर्ड सिस्टम (tiered system) का भी सुझाव दिया गया है, जिसके अनुसार जैसे-जैसे किशोर बड़े होंगे, उनके इस्तेमाल के अधिकार और पहुंच का स्तर धीरे-धीरे बढ़ेगा।

बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर असर

इस कदम से EU दुनिया के उन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए कानून बना रहे हैं या बना चुके हैं। भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन जैसे देश पहले से ही इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। Meta के Instagram और Facebook, Alphabet के YouTube, और ByteDance के TikTok जैसे बड़े ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स को कंप्लायंस कॉस्ट (compliance costs) और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल ये कंपनियां अपने इंटरनल मॉडरेशन और एज-गेटिंग टूल्स (age-gating tools) पर निर्भर करती हैं, लेकिन EU-व्यापी आदेश के तहत इन्हें यूज़र की उम्र वेरिफाई करने और कंटेंट एक्सपोजर को मैनेज करने के तरीके में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

निवेशकों के लिए, सबसे बड़ी चिंता यह है कि बड़ी टेक कंपनियों के लिए ऑपरेशनल और कंप्लायंस कॉस्ट (operational and compliance costs) बढ़ सकती है। EU का रेगुलेटरी प्रेशर अक्सर ग्लोबल प्राइवेसी और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के लिए एक मिसाल कायम करता है, जैसा कि जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) के मामले में देखा गया था। अगर सोशल मीडिया कंपनियों को अपने एल्गोरिदम (algorithms) को फिर से डिजाइन करना पड़ता है या छोटे यूज़र्स के लिए एड-टारगेटिंग (ad-targeting) की क्षमताओं को सीमित करना पड़ता है, तो इससे उनके लॉन्ग-टर्म रेवेन्यू मॉडल (revenue models) और यूज़र एंगेजमेंट (user engagement) पर दबाव पड़ सकता है।

इसके अलावा, यूरोपियन मार्केट में काम करने वाले प्लेटफॉर्म्स के लिए नॉन-कंप्लायंस (non-compliance) के चलते मुकदमेबाजी और भारी जुर्माने का जोखिम भी बना रहता है। निवेशकों को प्रस्ताव के अंतिम विवरण पर नज़र रखनी चाहिए, खासकर उम्र की पुष्टि के मानदंड (criteria for age verification) और आवश्यक पेरेंटल कंट्रोल (parental control) की सीमा, क्योंकि यही तय करेगा कि प्रभावित टेक दिग्गजों के लिए लागू करने की गति और लागत क्या होगी। इस मामले में अगला बड़ा अपडेट इसी साल आने की उम्मीद है।

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