यूरोपीय आयोग 17 सितंबर 2026 को 'EU Kids Act' पेश करने जा रहा है, जिसमें सोशल मीडिया, गेमिंग और AI चैटबॉट्स के लिए न्यूनतम आयु सीमा **15 वर्ष** तय की गई है। नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों पर उनके ग्लोबल रेवेन्यू का **6%** तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
सख्त सुरक्षा के नए नियम
यूरोपीय आयोग (European Commission) बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए 'EU Kids Act' लेकर आ रहा है। प्रस्तावित नियमों के तहत, 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्र एक्सेस नहीं मिलेगा। इसके लिए अलग-अलग श्रेणियों में नियम तय किए गए हैं:
- 3 से 12 साल: केवल बाल-सुलभ सेवाएं, पूरी तरह से पैरेंटल सुपरविज़न अनिवार्य।
- 13 से 14 साल: सख्त पैरेंटल कंट्रोल्स और दैनिक उपयोग की समय-सीमा (Daily usage caps) लागू होगी।
कंपनियों पर वित्तीय मार
इस कानून के लागू होने पर टेक कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत एज-वेरिफिकेशन (Age-verification) टूल्स लगाने होंगे। इसके अलावा, सुरक्षा नियमों के प्रवर्तन के लिए कंपनियों को एक अनिवार्य सुपरवाइजरी फीस भी चुकानी होगी।
भारी जुर्माना और अनिश्चितता
नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों को उनके ग्लोबल एनुअल रेवेन्यू का 6% तक जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। यह दंड प्रक्रिया 'Digital Services Act' की तर्ज पर बनाई गई है। हालांकि, यह बिल अभी कानून नहीं बना है; इसे यूरोपीय संसद और सदस्य देशों की सरकारों की मंजूरी मिलना बाकी है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा नीतिगत बदलाव है, जिससे आने वाले समय में कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और यूजर इंगेजमेंट पर भी असर पड़ सकता है।
