Smart Glasses पर EU की सख्त नकेल, प्राइवेसी नियमों के चलते बढ़ रहा बैन का खतरा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Smart Glasses पर EU की सख्त नकेल, प्राइवेसी नियमों के चलते बढ़ रहा बैन का खतरा

European Data Protection Board ने स्मार्ट ग्लासेस के लिए अनिवार्य रिकॉर्डिंग इंडिकेटर्स की मांग की है। प्राइवेसी चिंताओं के कारण कई रिटेलर्स ने बिक्री रोक दी है, जिससे टेक कंपनियों पर बड़ा दबाव है।

रेगुलेटर की नई गाइडलाइन्स

European Data Protection Board (EDPB) अब स्मार्ट ग्लासेस और वियरेबल टेक्नोलॉजी पर अपनी निगरानी बढ़ा रहा है। रेगुलेटर ने नई गाइडलाइन्स जारी की हैं, जिसके तहत अब हर स्मार्ट ग्लास में रिकॉर्डिंग शुरू होते ही एक क्लियर विजुअल लाइट या साउंड सिग्नल देना अनिवार्य होगा। इसका मुख्य उद्देश्य बिना किसी की जानकारी के चुपके से वीडियो रिकॉर्डिंग करने (covert surveillance) पर रोक लगाना है।

रिटेल और सरकारी एक्शन

यह नियम केवल कागजों तक सीमित नहीं है। नीदरलैंड और बेल्जियम के प्रमुख रिटेलर 'Hans Anders' ने प्राइवेसी नियमों का हवाला देते हुए Meta के Ray-Ban स्मार्ट ग्लासेस की बिक्री फिलहाल रोक दी है। वहीं, नॉर्वे समेत कई यूरोपीय देश सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और पार्कों में स्मार्ट ग्लासेस पर बैन लगाने पर विचार कर रहे हैं। ऑस्लो के स्कूलों और न्यूयॉर्क की अदालतों ने पहले ही इस तरह के डिवाइस के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

निवेशकों को अब सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि इसका सीधा असर Meta, Google, और Snap जैसी दिग्गज कंपनियों पर पड़ सकता है।

  • मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट: अनिवार्य रिकॉर्डिंग इंडिकेटर्स के लिए हार्डवेयर को दोबारा डिजाइन करना पड़ सकता है, जिससे लागत बढ़ेगी।
  • रेपुटेशनल रिस्क: प्राइवेसी से जुड़े विवादों के कारण ग्राहकों के बीच स्मार्ट ग्लासेस की स्वीकार्यता धीमी पड़ सकती है।
  • मार्केट सेंटीमेंट: यदि नियम सख्त होते हैं, तो इन कंपनियों के लिए नए मार्केट में एंट्री करना मुश्किल हो जाएगा।

अब देखना यह होगा कि क्या ये टेक कंपनियां अपने हार्डवेयर में बदलाव करती हैं या प्राइवेसी स्टैंडर्ड्स को लेकर रेगुलेटर के साथ मिलकर कोई बीच का रास्ता निकालती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.