AI Shopping Agents पर ई-कॉमर्स कंपनियों का 'ना', क्या ठप हो जाएगा ऑटोमेटेड कॉमर्स?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
AI Shopping Agents पर ई-कॉमर्स कंपनियों का 'ना', क्या ठप हो जाएगा ऑटोमेटेड कॉमर्स?

भारत की डिजिटल इकोनॉमी में एक नया टकराव देखने को मिल रहा है। पेमेंट कंपनियाँ AI-आधारित ऑटोनोमस शॉपिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही हैं, लेकिन बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स इसे ब्लॉक कर रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स को डर है कि AI एजेंट्स उनके अपने रिकमेंडेशन इंजन को बाईपास कर देंगे और Impulse Sales कम कर देंगे, जिससे ऑटोमेटेड कॉमर्स को अपनाने में सालों की देरी हो सकती है।

Detailed Coverage

यूजर डिस्कवरी पर छिड़ी जंग

इस पूरी लड़ाई की जड़ डिजिटल मार्केटप्लेस का बिजनेस मॉडल है। सालों से Amazon, Flipkart जैसी कंपनियाँ ऐसे एल्गोरिदम पर भारी निवेश कर रही हैं जो ग्राहकों के लिए प्रोडक्ट्स को ढूंढने और पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये टूल्स यूजर के व्यवहार को गाइड करने और अतिरिक्त खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए बनाए जाते हैं। इसके उलट, AI एजेंट्स को यूजर के निर्देशों का पालन करके तेजी से सबसे अच्छा डील या आइटम खोजने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो प्लेटफॉर्म के अपने डिस्कवरी टूल्स को पूरी तरह से बायपास कर देता है। चूंकि ये एजेंट्स ब्राउजिंग के बजाय एफिशिएंसी पर ध्यान केंद्रित करते हैं, इसलिए प्लेटफॉर्म्स को डर है कि वे यूजर एक्सपीरियंस पर अपना कंट्रोल खो सकते हैं और इससे भी महत्वपूर्ण बात, खरीदारी के फैसलों को प्रभावित करने का मौका गंवा सकते हैं।

प्लेटफॉर्म के रेवेन्यू मॉडल पर असर

डिस्कवरी पर कंट्रोल के अलावा, प्लेटफॉर्म्स इस बात से भी चिंतित हैं कि AI एजेंट्स उनके बॉटम लाइन को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। ई-कॉमर्स रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा Impulse Buying से आता है - ऐसा व्यवहार जिसे AI एजेंट्स दोहराने की संभावना नहीं रखते हैं। चूंकि ये एजेंट्स यूजर द्वारा निर्धारित स्ट्रिक्ट पैरामीटर्स के आधार पर काम करते हैं, इसलिए वे उन प्रमोशनल बैनरों या रेकमेंडेड आइटम्स को नजरअंदाज कर देते हैं जो आमतौर पर हायर ट्रांजेक्शन वैल्यू की ओर ले जाते हैं। इसके अतिरिक्त, अगर किसी एजेंट को लगातार कीमतों की निगरानी करने और केवल सबसे कम लागत पर खरीदने के लिए प्रोग्राम किया जाता है, तो प्लेटफॉर्म्स की प्राइसिंग पावर और मार्जिन पर भारी दबाव पड़ सकता है।

सिक्योरिटी और भरोसे का सवाल

बिजनेस पर चल रही इस लड़ाई के अलावा, ई-कॉमर्स प्लेयर्स कुछ ठोस सिक्योरिटी रिस्क भी बता रहे हैं। बाहरी AI एजेंट्स को डायरेक्ट चेकआउट सिस्टम के साथ इंटरैक्ट करने की अनुमति देने के लिए काफी भरोसे और मजबूत ऑथेंटिकेशन की जरूरत होगी। इंडस्ट्री के स्पष्ट मानकों के बिना, कंपनियां इन बॉट्स के जरिए होने वाले संभावित फ्रॉड या अनधिकृत खरीद के प्रति सतर्क हैं। इंडस्ट्री पिछले साल Amazon द्वारा AI प्लेटफॉर्म Perplexity के खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई जैसे हाई-प्रोफाइल ग्लोबल डिस्प्यूट्स के बाद सतर्क है, जिसमें अनधिकृत ब्राउज़र एजेंट गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई थी।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए

इंडस्ट्री के लिए, कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का वर्तमान फोकस फुल, एंड-टू-एंड ऑटोनोमस शॉपिंग एजेंट्स के बजाय सिंपल, कंट्रोल्ड चैटबॉट्स तक सीमित है। निवेशकों के लिए, मुख्य बात यह देखनी होगी कि क्या कोई स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल सामने आता है जो AI एजेंट्स को ई-कॉमर्स सिस्टम के साथ सुरक्षित रूप से इंटरैक्ट करने की अनुमति देता है, बिना प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह से डिसइंटरमीडिएट किए। जब तक यह गतिरोध हल नहीं हो जाता, तब तक पूरी तरह से ऑटोनोमस शॉपिंग का ट्रांजीशन शुरुआती टेस्टिंग फेज में रहने की संभावना है, और व्यापक, स्केलेबल एडॉप्शन देखने में दो से तीन साल लग सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.