DoorDash ने हैदराबाद में अपना नया ग्लोबल टेक्नोलॉजी हब खोला है। कंपनी का लक्ष्य **2026** तक **3,000** कर्मचारियों को काम पर रखना है ताकि कस्टमर सपोर्ट और एडमिनिस्ट्रेटिव काम सीधे इन-हाउस संभाले जा सकें।
भारत में विस्तार की नई चाल
DoorDash ने भारत में अपनी पहुंच बढ़ाते हुए हैदराबाद में एक नया ग्लोबल टेक्नोलॉजी हब लॉन्च किया है। पुणे के बाद भारत में यह कंपनी का दूसरा बड़ा केंद्र है। इस नए सेंटर का मुख्य उद्देश्य उन सेवाओं को इन-हाउस लाना है, जिन्हें अब तक बाहरी एजेंसियां संभालती थीं।
GCC मॉडल पर जोर
कंपनी ने 500 प्रोफेशनल्स के साथ काम शुरू कर दिया है और 2026 तक इसे 3,000 तक ले जाने का लक्ष्य है। इसे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) रणनीति कहा जाता है। इसका मकसद केवल कॉस्ट कटिंग नहीं, बल्कि सर्विस क्वालिटी और ऑपरेशनल कंट्रोल को बेहतर बनाना है।
हैदराबाद क्यों बना पसंद?
हैदराबाद में अब तक Costco, McDonald's और Charles Schwab जैसी दिग्गज कंपनियां अपना बेस बना चुकी हैं। Nasscom और Zinnov की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभी 2,100 से ज्यादा ऐसे सेंटर्स हैं जो लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों के नजरिए से यह कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने की कोशिश है। हालांकि, शुरुआत में इन्फ्रास्ट्रक्चर और हायरिंग पर भारी खर्च होगा, लेकिन लंबी अवधि में इससे मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। रिस्क के तौर पर, टेक टैलेंट के लिए हैदराबाद में कड़ी प्रतिस्पर्धा है, जिससे वेज इन्फ्लेशन (वेतन में वृद्धि) का दबाव बढ़ सकता है। अब देखना होगा कि कंपनी कितनी तेजी से इन नए कर्मचारियों को अपने ग्लोबल ऑपरेशंस में इंटीग्रेट कर पाती है।
