Dixon Technologies अब स्मार्टफोन असेंबली से आगे बढ़ रही है। कंपनी का फोकस कैमरा मॉड्यूल, सर्वर्स और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हाई-मार्जिन वाले बिजनेस पर है। हालांकि, इस भारी-भरकम विस्तार की लागत और बदलती बिजनेस रणनीति के चलते पिछले एक साल में शेयर **28%** तक फिसल चुका है।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
सालों तक Dixon Technologies का पूरा फोकस स्मार्टफोन असेंबली पर रहा है, जिससे कंपनी की 90% से ज्यादा कमाई आती है। अब मैनेजमेंट अपनी छवि बदलने की तैयारी कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य अगले 5 सालों में खुद को दुनिया की टॉप-10 EMS कंपनियों की लिस्ट में शामिल करना है, जिसके लिए वे कैमरा मॉड्यूल, सर्वर्स और डिफेंस हार्डवेयर जैसे जटिल क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं।
नई रणनीतियों और सरकारी सपोर्ट
कंपनी ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को भुनाने के लिए एक ताइवानी मैन्युफैक्चरर के साथ हाथ मिलाया है। नवंबर के आखिर तक Dixon अपना दूसरा IT हार्डवेयर प्लांट शुरू करने वाली है। यह कदम सरकार की PLI स्कीम का लाभ उठाने के लिए है, ताकि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रोडक्शन बढ़ाया जा सके और इंपोर्ट पर निर्भरता कम हो।
निवेशकों की चिंताएं और जोखिम
कंपनी के इतने बड़े विस्तार की योजनाओं के बावजूद शेयर में पिछले 1 साल में 28% की गिरावट आई है। निवेशक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि क्या यह कैपिटल-इंटेंसिव (पूंजी लगाने वाला) मॉडल भविष्य में मुनाफे को बढ़ा पाएगा? कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे टीवी और वाशिंग मशीन से हटकर नई कैटेगरी में जाना कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है।
ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए नया जॉइंट वेंचर
कैश फ्लो को बनाए रखने के लिए Dixon ने Vivo की स्थानीय यूनिट के साथ जॉइंट वेंचर किया है। यह पार्टनरशिप तब तक मदद करेगी जब तक कि कंपनी के नए प्रोजेक्ट्स अपनी रफ्तार नहीं पकड़ लेते।
निवेशकों के लिए काम की बात
शेयरधारकों को अब यह देखना होगा कि:
- नए IT हार्डवेयर प्लांट का आउटपुट कैसा रहता है?
- डिफेंस और डेटा सेंटर बिजनेस से बॉटम-लाइन (मुनाफे) में कब योगदान शुरू होता है?
- कंपनी अपना कर्ज (Debt) लेवल कैसे मैनेज करती है?
- नई फैक्ट्रियों की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity Utilization) की दर क्या है?
