Dixon Technologies ने अगले फाइनेंशियल ईयर (FY28) से अपने EBITDA मार्जिन में सुधार की उम्मीद जताई है। कंपनी का लक्ष्य FY27 तक मार्जिन को **3.0%** से **3.1%** के बीच बनाए रखना है। इस बीच, शेयर में पिछले साल **18%** की गिरावट दर्ज की गई है।
मार्जिन पर दबाव और भविष्य की रणनीति
भारत की जानी-मानी इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी Dixon Technologies ने अपने मुनाफे के मार्जिन को स्थिर करने के लिए एक रणनीति पेश की है। कंपनी का मानना है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) तक EBITDA मार्जिन 3.0% से 3.1% के बीच रहेगा। मैनेजमेंट का कहना है कि मौजूदा समय एक 'ट्रांजिशन पीरियड' है, क्योंकि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI 1.0) स्कीम के फायदे खत्म हो रहे हैं और कच्चे माल की लागत बढ़ रही है, जिससे मुनाफे पर असर पड़ा है।
रणनीति के मुख्य स्तंभ: Vivo JV और बैकवर्ड इंटीग्रेशन
भविष्य की कमाई को सहारा देने के लिए, कंपनी कई योजनाओं पर काम कर रही है। इनमें सबसे अहम है Vivo के साथ हुआ नया जॉइंट वेंचर (JV)। इस JV से अगले फाइनेंशियल ईयर से सालाना ₹35,000 करोड़ से ₹40,000 करोड़ तक का रेवेन्यू आने की उम्मीद है। Dixon का लक्ष्य FY27 के दूसरे हाफ तक इस रेवेन्यू का करीब 40% हासिल करना है, जो ऑपरेशनल इंटीग्रेशन की स्पीड पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, कंपनी कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले जैसे कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग में बैकवर्ड इंटीग्रेशन पर जोर दे रही है, ताकि बाहरी सप्लायर्स पर निर्भरता कम हो और लॉन्ग-टर्म मार्जिन सुधर सकें।
सेक्टर की चुनौतियां: मेमोरी चिप्स और घटती मांग
फिलहाल, भारतीय स्मार्टफोन सेक्टर मुश्किल दौर से गुजर रहा है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मार्केट में 10% से 15% तक की गिरावट आ सकती है। इसका मुख्य कारण मेमोरी चिप्स की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी है। ये चिप्स अब स्मार्टफोन की कुल लागत का 30% से 35% हो गए हैं, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा सिर्फ 12% था। लागत बढ़ने से एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) में 30% से 40% का इजाफा हुआ है, जिससे कंज्यूमर डिमांड पर असर पड़ा है।
इन चुनौतियों के बावजूद, Dixon Technologies, Vivo पार्टनरशिप को छोड़कर, इस साल 3.2 करोड़ से 3.3 करोड़ यूनिट्स की स्मार्टफोन शिपमेंट बनाए रखने की योजना बना रही है। कंपनी एक्सपोर्ट को भी एक बड़े ग्रोथ इंजन के तौर पर देख रही है, जिससे भविष्य में 150 से 200 लाख यूनिट्स की शिपमेंट से करीब ₹25,000 करोड़ का रेवेन्यू आ सकता है।
शेयर का प्रदर्शन और आगे क्या?
4 अगस्त 2026 तक, Dixon Technologies का शेयर ₹13,945 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले 12 महीनों में 18% से ज्यादा की गिरावट को दर्शाता है। करीब ₹85,200 करोड़ के मार्केट कैप वाली इस कंपनी के शेयर पर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के मुश्किल माहौल का असर दिख रहा है। निवेशक अब Mobile PLI 2.0 स्कीम के फाइनल गाइडलाइंस का इंतजार कर रहे हैं, जो आने वाले हफ्तों में जारी हो सकती हैं। इन गाइडलाइंस से EMS कंपनियों के लिए उपलब्ध फाइनेंशियल इंसेंटिव्स और मार्जिन प्रेशर को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
