Dixon Technologies के शेयरों में आज शानदार तेजी देखने को मिली, स्टॉक लगभग **6%** चढ़ गया। इसकी वजह ब्रोकरेज फर्म Investec का बुलिश नज़रिया है, जिसने कंपनी का टारगेट प्राइस बढ़ाकर **₹16,200** कर दिया है।
Dixon Technologies के शेयरों में सोमवार को जोरदार हलचल देखी गई। एनएसई (NSE) पर शेयर करीब 6% चढ़कर ₹13,161 के ऊपरी स्तर तक पहुंच गए। इस तेजी की मुख्य वजह ब्रोकरेज फर्म Investec की रिपोर्ट है, जिसने स्टॉक पर अपना भरोसा बनाए रखते हुए टारगेट प्राइस को ₹16,200 तक बढ़ा दिया है। यह पिछले क्लोजिंग प्राइस से काफी अच्छा उछाल दिखाता है। पिछले पांच ट्रेडिंग सेशन में यह लगातार पांचवीं बढ़त है, जिसमें शेयर 10% से ज़्यादा बढ़ चुका है।
स्पेशियलिटी EMS की ओर बड़ा कदम
विश्लेषकों के इस उत्साह का एक बड़ा कारण Dixon Technologies का स्पेशियलिटी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेगमेंट में विस्तार करना है। यह पारंपरिक EMS से अलग है, जो ज़्यादातर हाई-वॉल्यूम और कम मार्जिन वाले असेंबली पर फोकस करता है। स्पेशियलिटी सेगमेंट में ज़्यादा वैल्यू-एडेड प्रोसेस और कंपोनेंट्स शामिल होते हैं। कंपनी का यह कदम उसके प्रोडक्ट मिक्स और लंबी अवधि की कमाई की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। इसके साथ ही, Investec ने कंपनी के FY27 और FY28 के लिए प्रति शेयर आय (EPS) के अनुमान को 6% से 8% तक बढ़ाया है। ऐसा मोबाइल फोन वॉल्यूम पर मैनेजमेंट के मज़बूत गाइडेंस को देखते हुए किया गया है।
सेक्टर के ट्रेंड्स और कमाई का आउटलुक
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, क्योंकि ग्लोबल ब्रांड्स अपनी सप्लाई चेन को चीनी कंपनियों से हटाकर भारतीय निर्माताओं की ओर ला रहे हैं। इस ट्रेंड का फायदा Dixon को मिल रहा है। हालांकि, कंपनी को FY27 की पहली छमाही में ऑपरेटिंग मार्जिन में थोड़ी स्थिरता का सामना करना पड़ सकता है, जो प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) बेनिफिट्स के धीरे-धीरे खत्म होने का नतीजा है। लेकिन, विश्लेषकों को उम्मीद है कि साल की दूसरी छमाही से कमाई में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। कंपनी के मोबाइल एक्सपोर्ट बिजनेस को बढ़ाने पर ज़ोर देना इस अनुमानित रिकवरी का एक अहम फैक्टर माना जा रहा है।
भविष्य की ग्रोथ पर नज़र
निवेशकों के लिए, अब सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनी स्पेशियलिटी EMS बिजनेस को कैसे लागू करती है और मोबाइल की मांग कितनी स्थिर रहती है। हालांकि शेयर ने एनालिस्ट के अपग्रेड पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, लेकिन कंपनी की बैलेंस शीट पर असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वह इन नए हाई-वैल्यू ऑपरेशंस को कितनी प्रभावी ढंग से बढ़ा पाती है। इसके अलावा, सरकारी इंसेंटिव्स से धीरे-धीरे हटने का मतलब है कि आगामी तिमाही नतीजों में प्रॉफिट मार्जिन पर कड़ी नज़र रखी जाएगी, ताकि यह देखा जा सके कि एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी उन फायदों के नुकसान की भरपाई कर पाती है या नहीं। इस फिस्कल ईयर के आगे बढ़ने के साथ-साथ, EMS सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी की मार्केट शेयर बनाए रखने की क्षमता एक ऐसा फैक्टर बनी रहेगी जिस पर नज़र रखनी होगी।
