Dixon, Lava और Optiemus की नजर: सरकार की ₹62,500 करोड़ की स्कीम से बदलेगी तस्वीर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Dixon, Lava और Optiemus की नजर: सरकार की ₹62,500 करोड़ की स्कीम से बदलेगी तस्वीर

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां अब असेंबली से आगे बढ़कर खुद के स्मार्टफोन डिजाइन करने की तैयारी में हैं। सरकार की **₹62,500 करोड़** की नई मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का फायदा उठाने के लिए Dixon, Lava और Optiemus Infracom ने कमर कस ली है।

डिजाइन और ओनरशिप पर सरकार का जोर

सरकार की इस नई स्कीम का मकसद सिर्फ फोन की असेंबली करना नहीं, बल्कि 'वैल्यू एडिशन' को बढ़ावा देना है। सरकार ने 5% का इंसेंटिव सालाना बिक्री पर देने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, अगर कंपनियां स्थानीय स्तर पर आरएंडडी (R&D) टीम बनाती हैं और ग्लोबल पेटेंट हासिल करती हैं, तो उन्हें 3% का बोनस मिलेगा। साथ ही, पुर्जों की लोकल सोर्सिंग पर 1.5% का अतिरिक्त लाभ भी दिया जाएगा। यह रणनीति विदेशी कंपनियों के दबदबे को कम करने के लिए है।

कंपनियों की नई रणनीति

Dixon Technologies अपने मौजूदा बिजनेस मॉडल का विस्तार कर रही है। कंपनी पहले से ही Vivo India के साथ मिलकर काम कर रही है, लेकिन अब वह वैल्यू एडिशन पर फोकस कर रही है। वहीं, Optiemus Infracom ने Corning के साथ मिलकर कवर ग्लास बनाने के लिए एक बड़ा प्लांट लगाने का ऐलान किया है, जिसके फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी छमाही में शुरू होने की उम्मीद है।

बाजार की चुनौतियां और रिस्क

स्कीम आकर्षक जरूर है, लेकिन मार्केट में चुनौतियां कम नहीं हैं। 2026 तक स्मार्टफोन की सालाना बिक्री 12.5 करोड़ यूनिट्स तक गिरने का अनुमान है, जो पिछले 10 सालों का निचला स्तर है। ऐसे में नई या उभरती भारतीय कंपनियों के लिए ग्लोबल दिग्गजों के सामने टिकना और मार्जिन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। निवेशकों को अब सरकार की ओर से आने वाले 'Target Segment-2' फ्रेमवर्क का इंतजार है, जो इन कंपनियों की भविष्य की ग्रोथ का रास्ता तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.