Travel Sector में AI का दबदबा: 65 डिजिटल टचपॉइंट्स की चुनौती से कैसे निपटेंगी MakeMyTrip और EaseMyTrip?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Travel Sector में AI का दबदबा: 65 डिजिटल टचपॉइंट्स की चुनौती से कैसे निपटेंगी MakeMyTrip और EaseMyTrip?

ट्रैवल प्लानिंग अब पहले से कहीं ज्यादा जटिल हो गई है। यात्री एक ट्रिप की प्लानिंग के दौरान **65** अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारतीय ट्रैवल कंपनियों जैसे MakeMyTrip और EaseMyTrip के लिए यह डेटा कंटिन्यूटी बनाए रखने की एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए अब भारी निवेश की जरूरत है।

बदलती प्लानिंग, बढ़ती मुश्किलें

Skift Research और McKinsey & Company की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 में यात्री प्लानिंग के दौरान औसतन 45 टचपॉइंट्स का इस्तेमाल करते थे, जो साल 2026 तक बढ़कर 65 हो गए हैं। इसका मतलब है कि ग्राहक सोशल मीडिया, सर्च इंजन और AI असिस्टेंट्स के बीच बार-बार स्विच कर रहे हैं, जिससे डेटा लॉस का रिस्क बढ़ रहा है।

कंपनियों के लिए AI क्यों जरूरी है?

जब ग्राहक AI टूल से बुकिंग साइट पर जाता है और पुरानी सर्च हिस्ट्री गायब हो जाती है, तो उसे 'फ्रिक्शन' महसूस होता है, जिससे कन्वर्जन रेट (Conversion Rate) पर बुरा असर पड़ता है। MakeMyTrip जैसी कंपनियां अब वॉइस सर्च और पर्सनलाइज्ड आइटिनेरी (Itinerary) जैसे AI फीचर्स पर दांव लगा रही हैं ताकि यूजर रिटेंशन बना रहे।

निवेशकों के लिए चेतावनी (Investor Radar)

तकनीकी अपग्रेड्स के लिए किए जा रहे भारी कैपिटल स्पेंडिंग का असर शॉर्ट टर्म में प्रॉफिट मार्जिन्स पर दिख सकता है। निवेशकों को यह देखना होगा कि:

  • कन्वर्जन रेट: क्या AI के जरिए बुकिंग प्रोसेस स्मूथ हो रहा है?
  • कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट: क्या नई तकनीक से क्लाइंट को जोड़े रखने की लागत कम हो रही है?
  • मार्केट शेयर: क्या कंपनी उन AI-ड्रिवन सर्च लिस्ट में टॉप पर बनी हुई है जहां आज का ग्राहक पहले सर्च करता है?

अगले कुछ क्वार्टर्स में उन कंपनियों को फायदा होगा जो डिवाइस बदलने के बाद भी डेटा लॉस को रोकने का समाधान निकाल लेंगी। यह भारतीय ऑनलाइन ट्रैवल मार्केट में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.