सैन फ्रांसिस्को की स्टार्टअप कंपनी DetectifAI अब स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए खास AI मॉडल तैयार कर रही है। क्लाउड के बजाय अब सीधे फोन की हार्डवेयर चिप में डीपफेक कॉल डिटेक्शन की सुविधा दी जाएगी, जिसका परीक्षण भारत की फाइनेंशियल कंपनियों में हर महीने **1,00,000** कॉल्स के साथ किया जा रहा है।
स्मार्टफोन हार्डवेयर में बदलाव
फिलहाल, डीपफेक वॉयस स्कैम को पकड़ने के लिए क्लाउड-आधारित सिक्योरिटी का इस्तेमाल होता है, लेकिन DetectifAI इसे सीधे स्मार्टफोन के हार्डवेयर में लाने की तैयारी में है। कंपनी अपना सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट फोन निर्माताओं को लाइसेंस करेगी, जिससे यह फीचर कैमरे या बायोमेट्रिक सिक्योरिटी की तरह ही फोन का हिस्सा बन जाएगा। इससे डेटा वेरिफिकेशन की स्पीड बढ़ेगी और प्राइवेसी से जुड़ी चिंताओं में कमी आएगी।
भारत बना टेस्टिंग ग्राउंड
कंज्यूमर हार्डवेयर मार्केट में उतरने से पहले, कंपनी भारत के फाइनेंशियल सेक्टर में अपनी टेक्नोलॉजी को मजबूती से परख रही है। वर्तमान में भारत की फाइनेंशियल कंपनियां हर महीने 1,00,000 से ज्यादा कॉल्स को वेरिफाई करने के लिए इस तकनीक का उपयोग कर रही हैं। मुख्य रूप से लोन प्रोसेसिंग और डेट कलेक्शन के दौरान होने वाली बातचीत में यह तकनीक किसी भी संभावित फ्रॉड को तुरंत पकड़ने में मदद कर रही है।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां
साइबर सुरक्षा का यह बाजार बेहद प्रतिस्पर्धी है। DetectifAI को इस क्षेत्र में Pindrop, Reality Defender और Microsoft जैसे दिग्गजों से चुनौती मिल रही है, जो पहले से ही अपने Azure AI Content Safety जैसे एडवांस टूल्स के साथ बाजार में मौजूद हैं। कंपनी के सामने असली चुनौती यह साबित करना है कि उसका 'ऑन-डिवाइस' मॉडल सर्वर-साइड वाले बड़े टूल्स के मुकाबले ज्यादा असरदार है।
निवेशकों के लिए अहम मॉनिटरेबल्स
कंपनी का भविष्य स्मार्टफोन निर्माताओं के साथ होने वाली डील्स पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, निवेशकों को यह देखना होगा कि कैसे ये AI मॉडल मोबाइल की बैटरी लाइफ और प्रोसेसिंग पावर पर दबाव डाले बिना काम करते हैं। भारत में अपने क्लाइंट बेस को बनाए रखते हुए ग्लोबल स्तर पर विस्तार करना ही इस कंपनी की लंबी अवधि की सफलता की कुंजी होगी।
