Deezer का बड़ा ऐलान: 50% से ज़्यादा हुई AI गानों की संख्या, फ्रॉड पर कसेगा शिकंजा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Deezer का बड़ा ऐलान: 50% से ज़्यादा हुई AI गानों की संख्या, फ्रॉड पर कसेगा शिकंजा

म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Deezer ने बताया है कि अब रोज़ाना अपलोड होने वाले गानों में 50% से ज़्यादा AI (Artificial Intelligence) द्वारा बनाए गए हैं। कंपनी ऐसे AI कंटेंट को हटा रही है जो निष्क्रिय हैं या जिनमें धोखाधड़ी की गई है, ताकि असली कलाकारों की रॉयल्टी सुरक्षित रहे और प्लेटफॉर्म की क्वालिटी बनी रहे।

Detailed Coverage

AI गानों का दबदबा

म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Deezer ने अपने प्लेटफॉर्म पर कंटेंट में एक बड़े बदलाव की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, अब रोज़ाना अपलोड होने वाले गानों में आधे से ज़्यादा यानी 50% से भी ज़्यादा AI (Artificial Intelligence) द्वारा बनाए गए ट्रैक हैं। जून 2026 तक, रोज़ाना 90,000 नए AI गाने अपलोड हो रहे थे। मशीन द्वारा बनाए गए कंटेंट की इस भारी बढ़ोतरी को देखते हुए, Deezer ने धोखाधड़ी को रोकने और असली कलाकारों को सही मुआवज़ा देने के लिए सख़्त नीतियां लागू की हैं।

प्लेटफॉर्म की इकोनॉमी पर AI का असर

AI जनरेटेड गानों से मिलने वाली रॉयल्टी, पेशेवर संगीतकारों और गीतकारों के लिए निर्धारित भुगतान पूल को कम कर सकती है। Deezer के CEO Alexis Lanternier पिछले लगभग दो सालों से इस 'पेमेंट डाइल्यूशन' को कम करने पर काम कर रहे हैं। नई पॉलिसी खास तौर पर उन AI गानों को निशाना बनाती है जिन्हें पिछले छह महीनों में किसी श्रोता ने नहीं सुना है, या जो ऑटोमेटेड या धोखाधड़ी वाले स्ट्रीमिंग एक्टिविटी से जुड़े हैं। इस तरह के कंटेंट को हटाकर, Deezer अपने रिकमेन्डेशन की क्वालिटी सुधारना चाहता है और ग्राहकों के लिए सर्विस का महत्व बनाए रखना चाहता है।

ग्रोथ का ट्रेंड और डिटेक्शन टेक्नोलॉजी

प्लेटफॉर्म पर AI म्यूजिक की ग्रोथ तेज़ी से बढ़ी है। जनवरी 2025 में, AI कंटेंट रोज़ाना अपलोड का सिर्फ़ 10% (लगभग 10,000 ट्रैक) था। नवंबर 2025 तक यह बढ़कर 34% (50,000 ट्रैक) हो गया। 2026 में यह बढ़ोतरी और तेज़ हुई, अप्रैल में 44% तक पहुँचने के बाद, मिड-ईयर तक 50% के पार निकल गई। इस भीड़ को मैनेज करने के लिए, Deezer ने अपनी खुद की डिटेक्शन टेक्नोलॉजी डेवलप की है, जो Suno और Udio जैसे पॉपुलर AI मॉडल्स द्वारा बनाए गए संगीत को पहचानने में सक्षम है।

सेक्टर की चुनौतियां और रिस्क

म्यूजिक स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री फिलहाल AI को लेकर मुश्किल रेगुलेटरी और कानूनी माहौल से गुज़र रही है। Suno और Udio जैसी कंपनियां, जिनकी टेक्नोलॉजी से यह कंटेंट बनता है, कॉपीराइट को लेकर कानूनी मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन कानूनी लड़ाइयों के नतीजे AI जनरेटेड म्यूजिक की उपलब्धता और वैधता को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकते हैं।

अलग-अलग कंपनियां इस दबाव से निपटने के लिए अपने रास्ते चुन रही हैं। जहां Bandcamp जैसे प्लेटफॉर्म ने AI म्यूजिक पर बैन लगा दिया है, और Tidal ने इसकी रॉयल्टी देना बंद कर दिया है, वहीं Apple Music और Spotify जैसे अन्य प्लेटफॉर्म अलग-अलग टैगिंग और पॉलिसी-आधारित सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। Deezer के लिए, मुख्य चुनौती यह है कि नए कंटेंट के आने और डिटेक्शन की बढ़ती लागत के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, साथ ही कॉपीराइट से जुड़े मुकदमेबाजी के रिस्क को भी मैनेज किया जाए। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या ये कंटेंट मॉडरेशन के प्रयास ऑपरेटिंग खर्च को बढ़ाते हैं या वे कलाकारों और श्रोताओं के बीच प्लेटफॉर्म की ब्रांड वैल्यू को सफलतापूर्वक बनाए रख पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.