पूर्व व्हाइट हाउस सलाहकार David Sacks ने OpenAI और Anthropic को चुनौती दी है कि अगर उन्हें AI सुरक्षा को लेकर इतना ही डर है, तो वे सरकारी नियमों का इंतजार करने के बजाय खुद अपना काम धीमा करें।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सुरक्षा को लेकर जारी बहस अब और तेज हो गई है। David Sacks, जो व्हाइट हाउस के पूर्व सलाहकार रह चुके हैं, ने OpenAI और Anthropic जैसी बड़ी टेक कंपनियों को निशाने पर लिया है। Sacks का तर्क सीधा है—अगर इन कंपनियों को वाकई लगता है कि उनके AI मॉडल्स मानवता के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं, तो उन्हें सरकार द्वारा कानून बनाने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है, वे स्वेच्छा से अपनी रफ्तार कम कर सकते हैं।
नियमों की आड़ में अपनी सुरक्षा?
Sacks का मानना है कि इन कंपनियों का सरकार से रेगुलेशन की मांग करना सिर्फ सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि 'प्रोडक्ट-लायबिलिटी' से बचने का एक तरीका हो सकता है। अगर कोई कंपनी ऐसा AI लॉन्च करती है जिससे साइबर हमले या कोई बड़ा नुकसान होता है, तो उसे कानूनी और आर्थिक मार झेलनी पड़ सकती है। ऐसे में, सख्त नियमों के जरिए ये कंपनियां खुद को सुरक्षित करना चाहती हैं। यह रणनीति छोटे स्टार्टअप्स के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल बना सकती है क्योंकि वे भारी-भरकम 'कम्प्लायंस' (Compliance) का खर्च नहीं उठा पाएंगे।
ग्लोबल रेस और निवेशकों पर असर
अमेरिका और चीन के बीच AI को लेकर जारी 'आर्म्स रेस' का असर ग्लोबल मार्केट पर भी दिख रहा है। Sacks के मुताबिक, अगर अमेरिका ने अत्यधिक रेगुलेशन के चलते अपनी विकास दर धीमी कर दी, तो उसे चीन जैसे प्रतिस्पर्धियों से पिछड़ने का खतरा है।
निवेशकों के लिए स्थिति थोड़ी जटिल है। हालांकि OpenAI और Anthropic अभी प्राइवेट कंपनियां हैं, लेकिन उनका असर Microsoft और Alphabet जैसे दिग्गज शेयरों पर साफ दिखता है। वहीं, Meta जैसी कंपनियां 'अलाइनमेंट' (Alignment) पर फोकस कर रही हैं, ताकि AI मॉडल भरोसेमंद बने रहें। आने वाले समय में यह देखना जरूरी होगा कि AI बाजार 'क्लोज्ड रेगुलेटेड' मॉडल की ओर जाता है या 'ओपन-सोर्स' की राह पर। निवेशकों के लिए इन रेगुलेटरी अपडेट्स पर नजर रखना बेहद जरूरी है क्योंकि ये भविष्य के मार्केट कॉम्पिटिशन को तय करेंगे।
