Databricks के को-फाउंडर Arsalan Tavakoli-Shiraji का मानना है कि शानदार प्रोडक्ट के साथ सही ऑपरेशन्स और पार्टनरशिप ही एंटरप्राइज सेल्स की चाबी है। AI के दौर में यह रणनीति भारतीय IT कंपनियों के लिए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का नया रोडमैप तैयार कर रही है।
सिर्फ प्रोडक्ट से नहीं, रणनीति से जीतेंगे बाजार
ज्यादातर टेक स्टार्टअप्स यह मानकर चलते हैं कि एक बेहतर प्रोडक्ट अपने आप मार्केट पर कब्जा कर लेगा, लेकिन Databricks के को-फाउंडर और फील्ड इंजीनियरिंग के SVP, Arsalan Tavakoli-Shiraji का कहना है कि यह एक बड़ी भूल है। उनके मुताबिक, Fortune 500 कंपनियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए सिर्फ क्वालिटी काफी नहीं, बल्कि मजबूत ऑपरेशन्स और प्रोक्योरमेंट प्रोसेस की गहरी समझ जरूरी है।
माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिलकर बदली तस्वीर
Databricks ने अपनी स्केलिंग के लिए Microsoft Azure के साथ रणनीतिक साझेदारी की, जिसने कंपनी को उन बड़े संस्थानों तक पहुँच दिलाई जो पहले उनके लिए मुमकिन नहीं थे। आज Databricks खुद एक बड़े पार्टनर की भूमिका निभा रहा है, जो छोटे टेक फर्मों को बड़े मार्केट में जगह बनाने में मदद करता है।
भारतीय IT सेक्टर के लिए संकेत
यह बदलाव भारतीय दिग्गजों जैसे Tata Consultancy Services (TCS), Infosys, और HCLTech के लिए अहम है। कंपनियां अब सिर्फ AI नहीं खरीद रही हैं, बल्कि वे 'चार Cs' (Context, Choice, Cost, और Control) पर ध्यान दे रही हैं। IBM के पुराने मेनफ्रेम सिस्टम को मॉडर्न बनाना और उसमें AI एजेंट्स को फिट करना ही भविष्य में डिमांड को तय करेगा।
हाइब्रिड AI का दौर: एक्सपेरिमेंट से हकीकत तक
फिलहाल AI को लेकर बाजार में शोर ज्यादा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कंपनियां अभी भी प्रयोग के चरण (Experimental phase) में हैं। Tavakoli-Shiraji के अनुसार, जो कंपनियां सिर्फ AI के नाम पर नहीं, बल्कि वास्तविक और कॉस्ट-इफेक्टिव वैल्यू डिलीवर करेंगी, वही आगे बढ़ेंगी। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि भविष्य में बजट उन्हीं प्रोजेक्ट्स को मिलेगा जो बिजनेस के लिए साफ और स्पष्ट आउटकम दिखा पाएंगे।
