Digital Personal Data Protection (DPDP) Act अब केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए बड़ा इंजीनियरिंग खर्चा बन गया है। मई 2027 की डेडलाइन को देखते हुए कंपनियों पर भारी जुर्माने और बढ़ते वेतन खर्च का संकट मंडरा रहा है।
भारत में काम कर रही कंपनियों के लिए Digital Personal Data Protection (DPDP) Act अब एक नई वित्तीय चुनौती बनकर सामने आया है। 13 मई 2027 की डेडलाइन अब बहुत करीब है, जिससे कंपनियों का पूरा फोकस कानूनी पॉलिसी से हटकर जटिल इंजीनियरिंग अपग्रेड्स पर शिफ्ट हो गया है। निवेशकों के लिए यह एक चिंता का विषय है क्योंकि इससे बड़ी कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर बुरा असर पड़ सकता है।\n\n### इंजीनियरिंग और सिस्टम अपग्रेड का दबाव\n\nपुराने समय में कंपनियां डेटा प्राइवेसी को सिर्फ लीगल या एडवाइजरी का मुद्दा मानती थीं, लेकिन अब यह तकनीकी इंजीनियरिंग की प्राथमिकता बन गई है। कंपनियों को पता चल रहा है कि उनके पुराने सिस्टम (Legacy systems) आज के डेटा नियमों के मुताबिक नहीं हैं। अब उन्हें कोर डेटा पाइपलाइन्स को पूरी तरह से दोबारा डिजाइन करना पड़ रहा है, ताकि वे ऑडिट के लिए तैयार रह सकें। यह भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर शॉर्ट-टर्म में कैश फ्लो पर दबाव डाल रहा है। यदि कंपनियां समय पर सिस्टम को आधुनिक नहीं बना पाती हैं, तो उन्हें हर उल्लंघन पर ₹250 करोड़ तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।\n\n### प्राइवेसी इंजीनियरों की भारी कमी\n\nसिस्टम अपग्रेड के साथ-साथ कंपनियों को 'प्राइवेसी इंजीनियर्स' की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। ये वो स्पेशलिस्ट हैं जो सीधे सॉफ्टवेयर कोड में डेटा सुरक्षा को जोड़ सकते हैं। इस टैलेंट की भारी मांग के कारण कंपनियों को मोटा वेतन देना पड़ रहा है, जिससे एम्प्लॉई बेनिफिट खर्च में इजाफा हो रहा है। बैंकिंग, टेलीकॉम और कंज्यूमर टेक जैसे डेटा-हेवी सेक्टर्स में यह वेतन वृद्धि मुनाफे के मार्जिन को दबा सकती है।\n\nइसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एंट्री ने इस पूरे प्रोसेस को और महंगा बना दिया है। AI मॉडल्स के लिए और अधिक सोफिस्टिकेटेड आर्किटेक्चर की जरूरत है, जिससे हर नए प्रोडक्ट पर एक तरह का 'Compliance Tax' लग रहा है।\n\n### निवेशकों को क्या देखना चाहिए?\n\nआने वाली तिमाहियों में आईटी खर्च और ऑपरेशनल कॉस्ट में उछाल देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि कंपनियां इस बदलाव को कितनी कुशलता से मैनेज कर रही हैं। उन कंपनियों पर नजर रखें जो बिना किसी बड़े प्रोजेक्ट डिले या कॉस्ट ओवररन्स के इन प्राइवेसी कंट्रोल्स को अपना रही हैं, क्योंकि नियम पालन में असफलता सीधे कंपनी की बॉटम लाइन पर चोट करेगी।
