साइबर क्रिमिनल्स अब हैकिंग जैसे टेक्निकल तरीके छोड़कर सीधे फोन कॉल पर लोगों को ठग रहे हैं। मोबाइल यूजर्स को टारगेट करने वाले ऐसे स्कैम में **67%** की भारी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, कुल फ्रॉड की कोशिशें कम हुईं, लेकिन हर एक फ्रॉड में **35%** की बढ़ोतरी देखी गई है। भारतीय अथॉरिटीज ने अब तक **26 लाख** से ज्यादा डमी (mule) अकाउंट्स को ऐसे अवैध फंड की आवाजाही से जोड़ा है।
Detailed Coverage
स्कैमर्स का नया दांव: सीधे फोन पर धोखाधड़ी
साइबर क्राइम का तरीका तेजी से बदल रहा है। जुलाई 2026 की Biocatch की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कैमर्स अब डायरेक्ट एक्सेस ट्रोजन (Remote Access Trojans) जैसे मुश्किल टेक्निकल अटैक से दूर जा रहे हैं। उनकी जगह अब सीधे फोन पर साइकोलॉजिकल मैनिपुलेशन (psychological manipulation) का इस्तेमाल बढ़ रहा है। 2025 के आखिर और 2026 की पहली छमाही के बीच फ्रॉड की कोशिशों में 12% की कमी आई, लेकिन हर मामले में हुए नुकसान में 35% का इजाफा हुआ है। इससे साफ है कि क्रिमिनल्स अब कम लेकिन बड़े फ्रॉड पर फोकस कर रहे हैं।
मोबाइल पर बढ़ रहे हैं हमले
मोबाइल बैंकिंग इन खतरों का मुख्य मैदान बन गया है। डेटा दिखाता है कि मोबाइल पर होने वाले फ्रॉड सेशन में 67% की बढ़ोतरी हुई है। iOS यूजर्स के लिए यह 86% और Android यूजर्स के लिए 35% है। वहीं, वेब ब्राउज़र के जरिए होने वाले फ्रॉड 10% कम हुए हैं। SMS का इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए 146% बढ़ गया है, जिससे लोगों को फोन पर बातचीत में फंसाया जा रहा है। इन कॉल्स के दौरान, पीड़ितों को खुद ट्रांजेक्शन करने के लिए गाइड किया जाता है, जिससे वे उन सिक्योरिटी अलर्ट को बायपास कर देते हैं जो असामान्य डिवाइस एक्टिविटी पर ट्रिगर होते हैं।
डमी अकाउंट्स (Mule Accounts) का खेल
इन अपराधों के पीछे डमी अकाउंट्स (mule accounts) का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है, जिनका इस्तेमाल अवैध पैसे को लेयर करने और वॉश करने के लिए होता है। ये अकाउंट्स अक्सर असली पहचान दस्तावेजों से खोले जाते हैं या फिर सोशल मीडिया और फेक जॉब एडवर्टाइजमेंट के जरिए रिक्रूट किए गए भोले-भाले लोगों से किराए पर लिए जाते हैं। पैसा इन अकाउंट्स में आते ही, उसे डिटेक्ट होने से बचाने के लिए UPI जैसे सिस्टम से तेजी से ट्रांसफर किया जाता है, और फिर उसे कैश या क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता है।
सरकारी और रेगुलेटरी एक्शन
इस फाइनेंशियल खतरे का पैमाना काफी बड़ा है। ऑफिशियल आंकड़ों के मुताबिक, 26.5 लाख डमी अकाउंट्स के मामले सामने आए हैं, जिनमें कुल ₹22,496 करोड़ की शिकायतें दर्ज की गईं। इसे रोकने के लिए, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने 700 बैंक ब्रांचों में 8.5 लाख अकाउंट्स को संभावित डमी नोड्स के तौर पर पहचाना है। रेगुलेटरी और लॉ एनफोर्समेंट के प्रयासों से 4.5 लाख से ज्यादा डमी अकाउंट्स फ्रीज किए जा चुके हैं, जिससे ₹9,055 करोड़ के अनधिकृत ट्रांजेक्शन रोके या रोके जा चुके हैं।
बैंक ग्राहकों और इन्वेस्टर्स के लिए, यह समझना जरूरी है कि ये वेरिफिकेशन गैप्स कैसे बढ़ रहे हैं। जैसे-जैसे हमलावर सॉफ्टवेयर की बजाय सीधे अकाउंट होल्डर को मैनिपुलेट करने की ओर बढ़ रहे हैं, रियल-टाइम ट्रांजेक्शन मॉनिटरिंग और नए अकाउंट खोलने के लिए सख्त KYC नियमों पर निर्भरता बढ़ेगी। डिजिटल पेमेंट सेक्टर की स्थिरता को समझने के लिए, इंस्टेंट पेमेंट चैनलों के इस्तेमाल और डमी पैटर्न की पहचान के लिए बैंकों के नए नियमों पर भविष्य के रेगुलेटरी अपडेट्स पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
