CuspAI को मिले $450 मिलियन, AI से मटेरियल खोजने वाली कंपनी का वैल्यूएशन $2.6 बिलियन पहुंचा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
CuspAI को मिले $450 मिलियन, AI से मटेरियल खोजने वाली कंपनी का वैल्यूएशन $2.6 बिलियन पहुंचा

ब्रिटिश स्टार्टअप CuspAI ने सीरीज B फंडिंग राउंड में **$450 मिलियन** की भारी रकम जुटाई है। जेफ बेजोस के फंड का भी साथ मिला है। कंपनी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए नई मैटेरियल्स बनाने पर काम कर रही है। 48 से ज्यादा टेक पार्टनर्स, जिनमें Nvidia और Meta शामिल हैं, के साथ मिलकर मटेरियल की खोज को तेज़ करने और दुर्लभ धातुओं पर निर्भरता कम करने की योजना है।

AI की मदद से मटेरियल की खोज

दो साल पुरानी ब्रिटिश टेक कंपनी CuspAI ने सीरीज B फंडिंग राउंड में $450 मिलियन का फंड हासिल किया है। इस निवेश के बाद कंपनी का वैल्यूएशन बढ़कर $2.6 बिलियन हो गया है। इस पैसे का इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए खास मैटेरियल्स की खोज को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।

सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर फोकस

शुरुआत में CuspAI कार्बन कैप्चर और वॉटर प्यूरिफिकेशन पर रिसर्च कर रही थी, लेकिन पिछले एक साल में कंपनी ने अपनी स्ट्रेटेजी बदली है। CEO चार्ड एडवर्ड्स ने बताया कि अब फर्म का 80% रिसर्च चिप मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने वाले नए मैटेरियल्स खोजने पर केंद्रित है। इसका एक बड़ा लक्ष्य रूथेनियम (ruthenium) और इरिडियम (iridium) जैसी दुर्लभ और सप्लाई चेन के लिए सेंसिटिव धातुओं के विकल्प खोजना है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब ग्लोबल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री सप्लाई की कमी से बचने के लिए इनोवेशन की तलाश में है, जिसने हाल के वर्षों में कई टेक सेक्टर्स को प्रभावित किया है।

AI मैटेरियल्स फाउंड्री और इंडस्ट्री कोलैबोरेशन

अपने रिसर्च को तेज़ करने के लिए CuspAI ने 'AI मैटेरियल्स फाउंड्री' लॉन्च किया है। यह एक कोलैबोरेटिव इनिशिएटिव है जिसमें 48 से अधिक पार्टनर्स शामिल हैं, जिनमें Nvidia Corp. और Meta Platforms Inc. जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी हैं। फाउंड्री मॉडल का उद्देश्य सदस्यों के बीच कंप्यूटिंग पावर और साइंटिफिक एक्सपर्टाइज को शेयर करके ऐसे सॉफ्टवेयर बनाना है जो पारंपरिक लैब तरीकों की तुलना में बहुत तेज़ी से नए मैटेरियल्स की पहचान कर सकें। रिसोर्सेज को पूल करके, कंपनी मटेरियल साइंस में आने वाली हाई डेवलपमेंट कॉस्ट और लंबे समय को कम करना चाहती है।

चुनौतियां और मार्केट आउटलुक

इस प्रोजेक्ट में कई टेक्निकल और एक्सपेरिमेंटल चुनौतियां हैं, क्योंकि कंपनी अभी तक कोई ऐसा मटेरियल नहीं बना पाई है जो बड़े पैमाने पर कमर्शियल इस्तेमाल के लिए तैयार हो। इस इनिशिएटिव की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि फाउंड्री का AI सॉफ्टवेयर ऐसे मैटेरियल्स का सफलतापूर्वक अनुमान लगा पाता है या नहीं जिन्हें मास मैन्युफैक्चरिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सके। मटेरियल साइंस एक जटिल और अप्रत्याशित क्षेत्र होने के कारण, यह अनिश्चित है कि ये इनोवेशन कब तक फैक्ट्री फ्लोर तक पहुंच पाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.