Coursera पर भारत में AI कोर्स के लिए छात्रों की भीड़ उमड़ पड़ी है, जहाँ हर मिनट **12** नए साइन-अप हो रहे हैं। कंपनी ने मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए अपनी फीस में **40%** तक की कटौती की है और भारतीय IT कंपनियों के साथ मिलकर स्किल्स गैप को भरने की तैयारी शुरू कर दी है।
भारत पर खास फोकस और नई रणनीति
Coursera ने भारत को अपने ग्लोबल विस्तार के लिए सबसे अहम मार्केट के रूप में चुना है। प्लेटफॉर्म के आंकड़ों के मुताबिक, AI और जेनरेटिव AI कोर्स की जबरदस्त मांग है। इस मांग को भुनाने के लिए कंपनी ने 'Geo-pricing' मॉडल अपनाया है। इसका मतलब है कि भारतीय छात्रों के लिए सब्सक्रिप्शन फीस अंतरराष्ट्रीय दरों से 40% कम रखी गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा सके।
IT सेक्टर के साथ नई साझेदारी
कंपनी अब केवल छात्रों तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। Coursera का फोकस अब 'Forward Deployed Engineers' तैयार करने पर है। ये वे प्रोफेशनल्स होंगे जो कंपनियों की तकनीकी और बिजनेस जरूरतों के बीच पुल का काम करेंगे। IT फर्मों के साथ मिलकर कंपनी अपनी रेवेन्यू स्ट्रीम को भी स्थिर (Stable) बनाने की कोशिश कर रही है।
चुनौतियां और निवेशकों के लिए संकेत
भारत का एडटेक (Edtech) मार्केट काफी कॉम्पिटिटिव है। हालांकि कंपनी तेजी से पैर पसार रही है, लेकिन एग्रेसिव प्राइसिंग का असर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर भी पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में कंपनी के कोर्स कम्प्लीशन रेट और पार्टनरशिप से होने वाली कमाई पर नजर रखनी चाहिए। क्या यह मॉडल लंबी अवधि में मार्जिन को सुरक्षित रख पाएगा, यही सबसे बड़ा सवाल है।
