स्पेस स्टार्टअप Cosmoserve Space ने हैदराबाद में अपनी नई फैसिलिटी 'Base 1' लॉन्च की है। **$6 मिलियन** की फंडिंग के बाद कंपनी अब ऑटोनॉमस रोबोटिक्स के जरिए अंतरिक्ष का कचरा साफ करने की तैयारी में है, हालांकि जुलाई 2026 की एक तकनीकी विफलता कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारत के उभरते स्पेस-टेक सेक्टर में तेजी देखी जा रही है। Cosmoserve Space ने हैदराबाद में 'Base 1' का उद्घाटन किया है, जो सैटेलाइट मेंटेनेंस और स्पेस मलबे को हटाने के लिए पूरी तरह समर्पित है। इस सेंटर में ऑर्बिटल रेंडरवू लैब, एडवांस्ड रोबोटिक्स और मिशन कंट्रोल सिस्टम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं हैं।\n\n### क्या है कंपनी का विजन?\n\nकंपनी की मुख्य तकनीक 'Dual Spacecraft Architecture' पर आधारित है। इसका लक्ष्य सैटेलाइट सर्विसिंग की लागत को $10 मिलियन से घटाकर $1 मिलियन प्रति यूनिट से भी कम करना है। इस मिशन के लिए कंपनी अब तक कुल $9 मिलियन की पूंजी जुटा चुकी है, जिसमें हाल ही में $6 मिलियन की सीड फंडिंग शामिल है। इस निवेश दौर का नेतृत्व Rebright Partners ने किया, जिसमें Aranya Holdings, Naandi Ventures, AUM Ventures और Shakti VC ने भी हिस्सा लिया।\n\n### बड़ी चुनौती और भविष्य की राह\n\nहालांकि इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में कंपनी ने बड़ी छलांग लगाई है, लेकिन अभी भी यह एक रिस्की फेज में है। जुलाई 2026 में Skyroot Aerospace के Vikram-1 रॉकेट पर भेजे गए 'Mission Embrace' पेलोड के दौरान रोबोटिक कैप्चर पेटल्स काम नहीं कर पाए थे। कंपनी अभी भी उस डेटा का विश्लेषण कर रही है।\n\nइस स्पेस-टेक फर्म की असली अग्निपरीक्षा 2027 में होने वाली फुल-स्केल डीब्रिस कैप्चर डेमोंस्ट्रेशन के दौरान होगी। यह तकनीक न केवल कंपनी के बिजनेस मॉडल के लिए, बल्कि भारत के भविष्य के 'Bharatiya Antariksh Station' और 'Gaganyaan' मिशन के उद्देश्यों के लिए भी काफी मायने रखती है।
