कॉरपोरेट जगत में AI एडॉप्शन की रफ्तार अगस्त में घटकर महज **0.4%** रह गई है। टोकन प्राइसेज में गिरावट के कारण कंपनियां अब महंगे मॉडल्स के बजाय किफायती विकल्पों को प्राथमिकता दे रही हैं, जो AI कंपनियों के रेवेन्यू के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
AI के क्षेत्र में हो रही भारी-भरकम खर्च की रफ्तार अब एक बड़े 'रियलिटी चेक' का सामना कर रही है। अगस्त के आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनियों द्वारा AI टूल्स को अपनाने की दर केवल 0.4% बढ़ी है, जो बाजार की उम्मीदों के मुकाबले काफी कम है। अब कंपनियां बिना सोचे-समझे AI में पैसा झोंकने के बजाय 'कॉस्ट एफिशिएंसी' और तत्काल रिटर्न पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।\n\nइस सुस्ती की मुख्य वजह टेक्नोलॉजी कॉस्ट में आई कमी है। AI टोकन्स—जिनके जरिए प्रोसेसिंग पावर को मापा जाता है—उनकी कीमतें घटकर अब $0.97 प्रति 10 लाख टोकन्स के स्तर तक आ गई हैं। हालांकि इससे कंपनियों के बैलेंस शीट पर बोझ कम हुआ है, लेकिन AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए यह एक 'रेवेन्यू बॉटलनेक' बन गया है। इन कंपनियों को अपनी कमाई बढ़ाने के लिए भारी वॉल्यूम की जरूरत है, जो फिलहाल बाजार में नहीं दिख रहा है।\n\n### 'AI टैक्स' से बचने की कोशिश\n\nबड़ी संस्थाएं अब नए और महंगे मॉडल्स के बजाय पुराने, स्थिर और सस्ते वर्जन का इस्तेमाल कर रही हैं। इसे 'AI टैक्स' यानी सिस्टम चलाने के लगातार बढ़ते खर्च को नियंत्रित करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। विशेष रूप से 'एजेंटिक AI' (Agentic AI) के मामले में कंपनियां फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं, क्योंकि इसमें टोकन्स का इस्तेमाल अनपेक्षित रूप से बढ़ जाता है।\n\nनिवेशकों के लिए, यह चलन AI क्षमता के विस्तार और वास्तविक डिमांड के बीच एक बड़ा अंतर पैदा कर रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां, जिन्होंने हार्डवेयर और ट्रेनिंग पर अरबों का निवेश किया है, वे अब मार्जिन प्रेशर के जोखिम में हैं। अगर कंपनियों का यह 'मितव्ययी रवैया' (Cost-control measure) जारी रहता है, तो पूरे एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर सेक्टर की ग्रोथ उम्मीदों को दोबारा जांचने की जरूरत पड़ सकती है।
